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Independence Day 2020: तीन दिन तक फांसी के फंदे पर लटका रहा था मोहर सिंह का शव, वीरों ने अंग्रेजों से लिया था लोहा

Fri, 14 Aug 2020 04:10 PM IST
कपिल kapil न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शामली Published by: कपिल kapil Updated Fri, 14 Aug 2020 04:10 PM IST
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Independence day 2020: Know the story of fighters of Shamli district
शामली एसटी तिराहे पर एकता पार्क में लगी चौधरी मोहर सिंह की प्रतिमा। - फोटो : अमर उजाला

भारत को आजादी दिलाने में अनेक वीरों को अपने प्राणों की आहुति देनी पड़ी। शामली में भी अनेक वीरों ने अंग्रेजों से लोहा लिया और स्वतंत्रता की राह में अपने प्राणों का बलिदान कर दिया।

Independence day 2020: Know the story of fighters of Shamli district
शामली एसटी तिराहे पर स्थित एकता पार्क। - फोटो : अमर उजाला

शामली के चौधरी मोहर सिंह भी ऐसे ही सेनानी थे। उन्होंने अन्य क्रांतिकारियों के साथ वर्ष 1857 में अंग्रेजों के खिलाफ मोर्चा खोला और उनकी तोपों के आगे तन गए। कहा जाता है कि शहीद होने के बावजूद क्रांतिकारियों में दहशत फैलाने के लिए उनके शव को तीन दिन तक फांसी पर लटकाकर रखा गया था। एसटी तिराहे पर स्थित एकता पार्क में चौधरी मोहर सिंह की प्रतिमा लगी है। 

Independence day 2020: Know the story of fighters of Shamli district
एकता पार्क में लगी चौधरी मोहर सिंह की प्रतिमा। - फोटो : अमर उजाला

इस प्रतिमा पर लगे शिलापट्ट पर चौधरी मोहर सिंह की शहादत की दास्तां लिखी है। मोहर सिंह शामली के जमींदार चौधरी घासीराम के यहां जन्में थे। उनका नाम आजादी के आंदोलन में अग्रणी सेनानियों में रहा। उन्होंने आंदोलन की योजना मथुरा में गुरु विरजानंद के आश्रम में बनाई थी। चौधरी मोहर सिंह के साथ थानाभवन के काजी नियामत अली खां व महबूब अली खां ने मिलकर तहसील और रेजिडेंसी में आग लगा दी थी। उनकी अगुवाई में नौजवान अलग-अलग टुकड़ियों में अंग्रेजों से मुकाबला कर रहे थे। करीब दो महीने तक तहसील पर क्रांतिकारियों का कब्जा रहा था। फतेहपुर के जंगल में अंग्रेजों के साथ क्रांतिकारियों का संघर्ष हुआ था। शिलापट्ट पर दर्ज जानकारी के अनुसार यहां पर 225 पुरुष और 27 महिलाएं शहीद हुए थे। 

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Independence day 2020: Know the story of fighters of Shamli district
शामली एसटी तिराहे पर स्थित एकता पार्क। - फोटो : अमर उजाला

अंग्रेजों ने तोपें लगाकर शामली को चारों ओर से घेर लिया था। यहां पर थानाभवन के अब्दुल रहीम खां, सैदपुर के चौधरी भगवान सिंह, थानाभवन के चौधरी हरज्ञान सिंह, भैंसवाल के भवानी सिंह, आशा देवी, हरड़ के गेंदा सिंह, इंद्राकौर देवी, पुरबालियान के चौधरी हरपाल सिंह, शोभा देवी, परासौली के खैराती खां, शामली से मामकौर, सोरम से चौधरी लक्ष्मण सिंह, राजकौर, ढिकौली से शोभा सिंह के साथ चौधरी मोहर सिंह भी शहीद हो गए थे। इस शिलापट्ट पर दर्ज है कि क्रांतिकारियों में दहशत फैलाने के लिए झिंझाना-करनाल रोड पर मोहर सिंह के शव को तीन दिन तक फांसी पर लटकाकर रखा गया था। 

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