अंधविश्वास लुप्त से हो रहे पक्षियों के लिये काल बन रहा है। तांत्रिक क्रियाओं के जरिये खुद को शक्तिशाली बना लेने या बिना कुछ किए-धरे मन की इच्छाओं की पूरा करने की चाहत रखने वाले अंधविश्वासी कौए की बलि चढ़ा रहे हैं, श्मशान में तांत्रिकों द्वारा उल्लू की बलि दिए जाने की भी सूचना है।
श्मशान घाट में चिताओं पर की जा रही हैं तांत्रिक क्रियाएं, देखें तस्वीरें
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इसकी पुष्टि तब हुई जब स्योहरा के श्मशान में अंतिम संस्कार के बाद चिता से अस्थियां चुनने गए परिजनों ने चिता पर मुर्गे के अवशेष, शराब की बोतल, मरा हुआ कौआ, चिता के पास पड़ा खून देखा। यहां पर उल्लुओं की बलि भी चढ़ाने की बात सामने आई है।
पारिस्थितिक बदलाव और तमाम अन्य कारणों से उल्लू और कौओं की संख्या कम होती जा रही है। यहां तक कि श्राद्ध के दौरान भी कौएं मिलने मुश्किल हो जाते है। लेकिन बलि चढ़ाने वाले ऊंची कीमत देकर कौएं और उल्लुओं की खरीद कर रहे है। अंत्येष्टि के बाद वहां चिताओं के यह हालात देख कर फूल चुनने आए लोगों ने हंगामा भी किया। उन्होंने शमशान घाट में रहने वाले बाबा पर तांत्रिक क्रियाएं कराने का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की है।
मोहल्ला सोमवार का बाजार निवासी अधिवक्ता राजेश्वर दयाल अग्रवाल के 26 वर्षीय पुत्र अंकुश अग्रवाल की बीमारी के चलते रविवार को मौत हो गई थी। इसका रविवार को ही अंतिम संस्कार कर दिया गया। मंगलवार सुबह परिजन उसकी अस्थियां एकत्रित करने श्मशान घाट पर गए तो वहां का नजारा देखकर हैरान हो गए। रात में किसी ने जलती हुई चिता पर तांत्रिक क्रिया करने के लिए मुर्गा और काटा। इनका खून दूर तक फैला हुआ था। मरा हुआ कौआ, अंडे, शराब की बोतल,सिंदूर और अन्य तांत्रिक क्रिया करने का सामान भी वहां पड़ा हुआ था।
यह देखकर परिजनों ने हंगामा शुरू कर दिया। परिजनों ने श्मशान में रहने वाले बाबा पर तांत्रिक क्रियाएं कराने और श्मशान प्रबंधन समिति के अध्यक्ष ग्रामप्रधान खलीलपुर राजू सैनी पर प्रबंधन न करने का आरोप लगाया। बाबा ने स्वीकार किया कि यहां रोज ही तांत्रिक क्रिया करने वाले आते हैं। अधिवक्ता राजेश्वर दयाल अग्रवाल ने श्मशान घाट में तांत्रिक क्रियाएं करने कराने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की मांग की है।