तेल के अवैध कारोबार की आड़ में मेरठ महानगर के रिहायशी इलाकों में लोगों के जीवन से खिलवाड़ किया जा रहा है। अकेले लिसाड़ी गेट इलाके में ही 250 से ज्यादा अवैध कारखाने चल रहे हैं, इनमें कई तेल के धंधे से जुड़े हैं। इसके अलावा शहर और देहात के कई इलाकों में तेल के गोदाम चल रहे हैं, जो किसी घटना के बाद ही सामने आते हैं। पुलिस-प्रशासन और आपूर्ति विभाग भी कुछ दिन तक दावे करने के बाद चुप्पी साध लेता है।
मेरठ: रिहायशी इलाकों में लोगों की जान से खिलवाड़, बिना अनुमति चल रहे अवैध तेल गोदाम, प्रशासन अनजान
लिसाड़ी गेट क्षेत्र की आबादी करीब पांच लाख बताई जाती है। खुशहाल नगर तो मात्र एक उदाहरण है, जहां अवैध डीजल-पेट्रोल बनाने का काम चल रहा है। इसके अलावा समर गार्डन, उमर गार्डन, ईदगाह कॉलोनी, लिसाड़ी रोड, श्यामनगर, चमन कॉलोनी सहित करीब दर्जनभर इलाकों में केमिकल से पेट्रोल-डीजल में मिलावट की जाती है।
साल्वेंट और केरोसिन की मदद से पेट्रोल-डीजल बनाकर बाजार में खुला खपाया जाता है। यहीं से पेट्रोल पूरे क्षेत्र की दुकानों पर सप्लाई किया जाता है। दुकानदार 250 ग्राम और 500 ग्राम की बोतलों में इन्हें खुलेआम बेचते हैं। आपूर्ति विभाग और पेट्रोलियम कंपनियों ने इसकी सुध नहीं ली।
यहां तंग गलियों में स्क्रैप, नकली सिलिंडर, वेल्डिंग, पटाखे बनाने जैसे काम घरों में हो रहे हैं। जो बड़े हादसे का सबब बन सकते हैं। लेकिन आज तक भी किसी सरकारी विभाग ने संज्ञान नहीं लिया। यहां सारा अवैध काम थाना पुलिस की मिलीभगत से चल रहा है। यहां कोई भी काम पुलिस से साठगांठ कर किया जा सकता है। दो साल पहले केमिकल में लगी आग 12 घंटे की मशक्कत के बाद बुझी थी
दिल्ली रोड पर मेजर ध्यानचंद नगर में केमिकल के अवैध गोदाम को पुलिस-प्रशासन भूल गया है। स्थानीय लोगाें के अनुसार इस गोदाम में नकली तेल बनाया जाता था। गोदाम में 25 नवंबर 2019 को इतनी भीषण आग लगी थी कि भवन जहां पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था, तो 12 घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका था। गनीमत ये रही थी कि इसमें कोई जनहानि नहीं हुई थी।
इस गोदाम में अवैध रूप से यह धंधा होता था, यह खुलासा भी आग लगने के बाद ही हुआ, लेकिन प्रशासनिक तंत्र की बड़ी लापरवाही यह रही कि इस गोदाम के बराबर में मौजूद दूसरे गोदाम को उसी दिन सील करके डेढ़ साल बाद विगत दिनों सील खोलकर गोदाम में रखे केमिकल के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गए। गोदाम मालिक सचिन गुप्ता के खिलाफ आज तक भी कोई विभाग कोई कार्रवाई तय नहीं कर पाया।