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गुस्से में दिया तलाक, अब दोनों सुलह को तैयार पर परिजन और समाज हलाला पर अड़े

Wed, 12 Apr 2017 08:31 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ बिजनौर
अमर उजाला ब्यूरो/ बिजनौर Updated Wed, 12 Apr 2017 08:31 PM IST
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Husband gave an angry divorce, now both reconciliation is ready, but the family and the society
तीन तलाक मुद्दा

रोटी के ऊपर हुए विवाद के बाद एक व्यक्ति ने पत्नी को गुस्से में तीन तलाक दे दिया। गुस्सा उतरा तो वह बहुत पछताया। अब वह पत्नी को घर लाना चाहता है। पत्नी के परिजन और समाज के लोग हलाला की रस्म के बाद ही दोनों का निकाह कराने पर अड़ गए हैं। पति-पत्नी हलाला के लिए तैयार नहीं हैं।

Husband gave an angry divorce, now both reconciliation is ready, but the family and the society
सुप्रीम कोर्ट

पिछले दस महीने से यह मामला पंचायतों के बीच उलझा हुआ है। पति किसी भी सूरत में पत्नी को वापस चाहता है। पत्नी से भी बात हो चुकी है और वह मान गई है, पर हलाला की रस्म ने दोनों के बीच दीवार खड़ी कर दी है। परेशान पति अब सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक पर रोक लगाने के इंतजार में है। शहर कोतवाली के गांव गंगदासपुर निवासी नसीम का निकाह 28 साल पहले हल्दौर थाना क्षेत्र के गांव खारी निवासी इमामुद्दीन की बेटी हाशमी से हुआ था। दोनों के चार बच्चे हैं। वे एक बेटे और बेटी का वह निकाह कर चुके हैं। नसीम के पोते-पोती भी हैं।

Husband gave an angry divorce, now both reconciliation is ready, but the family and the society
तीन तलाक मुद्दा

नसीम के मुताबिक, दस माह पहले रोटी बनाने को लेकर उसका पत्नी से विवाद हो गया। हाशमी ने बहस की तो उसे गुस्सा आ गया। उसने पत्नी को तीन तलाक दे दिया। हाशमी मायके चली गई। गुस्सा उतरने पर नसीम पत्नी को लाने के लिए ससुराल गांव खारी गया। ससुराल वालों ने हाशमी को उसके साथ नहीं भेजा। गांव में बिरादरी की पंचायत हुई। कई बार पंचायतों का दौर चला, पर मामला नहीं सुलझा। नसीम के मुताबिक, ससुरालवाले पत्नी को बिना निकाह भेजने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने व गांव के अन्य लोगों ने पत्नी का दूसरी जगह निकाह करा तलाक कराने की हलाला की शर्त भी पूरी करने को कहा है।

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Husband gave an angry divorce, now both reconciliation is ready, but the family and the society
तीन तलाक मुद्दा

नसीम ने बताया कि दो दिन पहले उसकी पत्नी से बात हुई। वह भी नहीं चाहती कि हलाला की रस्म पूरी करे। ससुरालवालों के साथ बिरादरी के लोग उसके व पत्नी के बीच रोड़ा बने हैं। समाज के लोगों के आगे हारा नसीम अब इस इंतजार में है कि सुप्रीम कोर्ट कब तीन तलाक के खिलाफ फैसला देता है। वह अदालती कार्यवाही की भी जानकारी ले रहा है।

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अदालत में तीन तलाक मुद्दा
जमीयत उलेमा हिंद के जिला सदर कारी अरशद के मुताबिक, ऐसे मामले धर्म के जानकारों के सामने रखने चाहिएं। समाज को भी धर्म के कायदे-कानूनों की पूरी जानकारी नहीं है। इस मामले में धर्म के जानकार ही दोनों पक्षों के कलमबंद बयान लेकर फैसला ले सकते हैं।
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