बिजनौर के नजीबाबाद में बसपा नेता और प्रॉपर्टी डीलर हाजी अहसान, उनके भांजे की हत्या के बाद नजीबाबाद में गैंगवार छिड़ने की आशंका पैदा हो गई है। हाजी अहसान इस क्षेत्र का बड़ा नाम था। कई हत्याओं में हाजी अहसान का भी नाम आ चुका है, उनका अपना अलग गैंग है। प्रॉपर्टी को लेकर नजीबाबाद में कई बड़े लोगों की हत्या हो चुकी है। आगे तस्वीरों में जानें आखिर कैसे 28 साल पहले हुई तीन भाइयों की हत्या से जुड़ रहा है यह मर्डर केस: -
यूपी: ईद पर भाइयों की हत्या का 28 साल बाद लिया बदला, बसपा नेता व भांजे के मर्डर से गैंगवार की आशंका
नजीबाबाद के मोहल्ला पठानपुरा में मामूली विवाद में वर्ष 1990 में तीन सगे भाइयों की ईद पर चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई थी। इस तिहरे हत्याकांड में हाजी अहसान का नाम आया था। इसके बाद से ही हाजी अहसान दिल्ली में जा बसा था और वहीं प्रॉपर्टी डीलिंग का काम शुरू कर दिया था।
तीनों भाइयों की हत्या के बाद एक भाई यूसुफ पहाड़ी बचा था। वह तिहरे हत्याकांड की पैरवी कर रहा था। हाजी अहसान से इस केस में समझौते की बात चल रही थी। तीन साल पहले यूसुफ पहाड़ी की भी हत्या कर दी गई थी। इस हत्या का भी हाजी अहसान पर शक किया गया।
कई साल पहले प्रॉपर्टी डीलर डॉ. शमशाद की नजीबाबाद में हत्या कर दी गई। डॉ. शमशाद भी नजीबाबाद के लिए बड़ा नाम था। शमशाद की हत्या में भी हाजी अहसान का नाम आया था। पुलिस ने शमशाद की हत्या में मुजफ्फरनगर के अजमल पहाड़ी को दबोचा था। अजमल नजीबाबाद में किराए का मकान लेकर रहता था।
अजमल का ससुर हाजी अहसान के यहां नौकरी करता था। इसलिए डॉ. शमशाद की हत्या में हाजी अहसान का नाम आया था। अजमल पहाड़ी को शार्प शूटर बताया जाता है। वह इन दिनों गाजियाबाद की डासना जेल में बंद है।