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अफसरों से दोस्ती कर पाई दौलत-शोहरत, तेल का खेल उजागर होने के बाद प्रशासन के निशाने पर आया ज्ञानेंद्र

Sat, 21 Sep 2019 03:11 PM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Sat, 21 Sep 2019 03:11 PM IST
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Fake oil case:gyanendra chaudhry was on administration target after oil game was exposed in Meerut
पेट्रोल पंप के गोदाम पर छापेमारी - फोटो : अमर उजाला

तेल माफियाओं पर मेरठ जिला प्रशासन ने टेढ़ी नजर कर ली है। एक तरफ जहां लगातार इस मामले में नए खुलासे हो रहे हैं। मेरठ में होर्डिंग कारोबारी ज्ञानेंद्र चौधरी प्रशासन के रडार पर है। डेढ़ दशक में ज्ञानेंद्र ने अफसरों से दोस्ती कर नाम और पैसा जमकर कमाया। 2014 में जब पाइप लाइन से पूठा में तेल चोरी का प्रकरण सामने आया तो ज्ञानेंद्र को जेल जाना पड़ा और राष्ट्रीय सुरक्षा कानून लगा। जेल से छूटने के बाद भी ज्ञानेंद्र के आगे पुलिस प्रशासन नतमस्तक रहा। कई सफेदपोश नेताओं और अधिकारियों से मिलकर वह अपना धंधा चलाता रहा।

Fake oil case:gyanendra chaudhry was on administration target after oil game was exposed in Meerut
पेट्रोल पंप के गोदाम पर छापेमारी - फोटो : अमर उजाला

दो फरवरी 2014 को आईओसीएल की टीम को पाइप लाइन के प्रेशर में गिरावट का पता लगा था। पाइप लाइन को लेकर लंबी जांच हुई और दिल्ली, मथुरा और सोनीपत की टीम ने मेरठ में डेरा डाल लिया। आईओसीएल ने लीक डिस्ट्रैक्टर सिस्टम लगाया। मेरठ के आसपास पाइप लाइन की गश्त करने के लिए टीम को निर्देश दिए गए। जब पुलिस वेदव्यासपुरी और पूठा पहुंची तो एक प्लॉट में पाइप लाइन से कुछ दूरी पर टैंकर खड़ा मिला।

Fake oil case:gyanendra chaudhry was on administration target after oil game was exposed in Meerut
पेट्रोल पंप के गोदाम पर छापेमारी - फोटो : अमर उजाला

जांच में सामने आया कि ज्ञानेंद्र चौधरी ने किराए के भवन में तेल चोरी के लिए सेंधमारी कर रखी थी। आईओसीएल के लोगों को मौके पर ट्रक में जो टैंकर मिला, उसकी क्षमता करीब आठ हजार लीटर बताई गई। प्रतिदिन दो टैंकर डीजल यहां से निकाला जा रहा था। इसकी कीमत 2014 में आठ से दस लाख रुपये बताई गई। रोजाना दो टैंकर के हिसाब से 15 दिन में करीब डेढ़ करोड़ रुपये का तेल चोरी कर लिया गया। यदि पेट्रोल की बात करें, तो यही कीमत डेढ़ गुना ज्यादा बताई गई। हालांकि, कंपनी की ओर से चोरी हुए तेल की गणना नहीं की गई थी। मामला लखनऊ तक गूंजा था।

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Fake oil case:gyanendra chaudhry was on administration target after oil game was exposed in Meerut
पेट्रोल पंप के गोदाम पर छापेमारी - फोटो : अमर उजाला

ज्ञानेंद्र पर कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे निगम अधिकारी 
ज्ञानेंद्र चौधरी का होर्डिंग कारोबार में बड़ा नाम है। हालांकि जिस कंपनी के नाम से बीओटी आदि के ठेके लिये जाते हैं, उसके निदेशक मंडल में ज्ञानेंद्र का नाम नहीं है। मगर पूरा कारोबार ज्ञानेंद्र ही संभालता है। अभिनव एडवरटाइजिंग कंपनी ने नगर निगम में छह बीओटी मार्गों का ठेका लिया है। पांच साल से बीओटी की एक भी शर्त का अनुपालन नहीं हुआ है। लेकिन नगर निगम ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है।

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fake petrol, petrol - फोटो : अमर उजाला

कंपनी के निदेशक सचिन चौधरी हैं। लेकिन ज्ञानेंद्र ही इसे संचालित करता है। शहर की सड़कों पर डायरेक्शन बोर्ड लगाने के बजाय यूनिपोल खड़े कर दिए, जिससे नगर निगम को प्रतिवर्ष लाखों का चूना लग रहा है। निगम प्रशासन के मुताबिक बीओटी ठेकेदार को शहर के छह मार्गों पर 26 स्थानों पर डायरेक्शन बोर्ड लगाने की अनुमति दी गई थी। लेकिन ठेकेदार ने 150 से अधिक यूनिपोल खड़े कर दिए। स्ट्रीट लाइट, डिवाइडर की मरम्मत, रंगाई-पुताई पर कोई काम नहीं हुआ।

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