दहलाने वाले हादसे में जान गंवाने वाली सावित्री की तीन बेटियां अब भी मां का इंतजार कर रही हैं। मामा के घर में एक कमरे में बैठी सावित्री की बेटियों को यह पता ही नहीं कि उनकी मां हमेशा के लिए उन्हें छोड़कर दुनिया से चली गई। एक पल में उजड़ गईं आठ जिंदगियां...
बेटियों को मां का इंतजार... गांव में पसरा मातम, एक पल में उजड़ गईं आठ जिंदगियां, तस्वीरें
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सावित्री जाते समय बेटियों से कहकर गई थी इधर-उधर मत जाना वो जल्दी ही लौट आएगी। देर शाम तक सावित्री की तीनों बेटियां मामा के घर के एक कमरे में बैठकर मां के आने का इंतजार कर रहीं थीं। गांव के लोगों ने भी उन्हें नहीं बताया कि उनकी मां और मामा अश्वनी अब इस दुनिया में नहीं रहे।
परिजनों को उचित मुआवजा दिए जाने की मांग
मेघराजपुर में चारों और जहां मातम पसरा हुआ है। वहीं गांव के एक छोर पर बैठे लोग इस बात को लेकर फिक्रमंद हैं कि जिन बच्चों के सिर से मां-बाप का साया उठ चुका उनका क्या होगा। ग्रामीण सुनील कुमार, सुमित कुमार, विजयपाल, पिंटू, विशाल, प्रदीप, कृष्णपाल, सुशील आदि का कहना है कि सरकार को चाहिए कि वह मृतक परिजनों को उचित मुआवजा दे। इसके साथ ही बच्चों की शिक्षा और भविष्य के लिए व्यवस्था की जाए।
ग्रामीणों ने बताया कि ऐसा हादसा गांव में पहली बार हुआ है। हादसे में आठ लोगों की मौत से पूरे मेघराजपुर गांव में मातम पसरा हुआ है। देर शाम तक गांव के किसी भी घर में चूल्हा नहीं जला। चारों तरफ सन्नाटा पसरा हुआ है। जिन्होंने सड़क हादसे में अपनों को खोया उनकी परिजन महिलाओं के रोने की आवाज सन्नाटे को चीर रही हैं।
दो माह पूर्व गांव में रहने आई थी राधिका
मेघराजपुर गांव निवासी होशराम दो माह पूर्व ही परिवार के साथ गांव में रहने के लिए आया था। सड़क हादसे में उसकी पत्नी राधिका की मौत हुई है। इससे पूर्व वह पहाड़पुर गांव में रहते थे। यहां रहकर दोंनों मजदूरी कर परिवार का पालन पोषण कर रहे थे। राधिका की मौत से होशराम सदमे में है।
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