ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार यों ही खास नहीं थे। उनका मेरठ से गहरा नाता रहा। यहां उनका जब-तब आना-जाना ही नहीं हुआ था, वह यहां के लोगों के दिलों में बसते थे। हर किसी के पास उनके अपनेपन के किस्से हैं। इनसे पता चलता है कि फिल्मी दुनिया में व्यस्तता के बावजूद वह निजी रिश्तों को पूरी अहमियत देते थे। बुधवार को उनकी मौत के बाद तमाम लोगों ने उन्हें शिद्दत से याद किया।
ट्रेजडी किंग की खास यादें: अभिनेता वेद थापर को बुलाते थे लाले पुत्तर, पढ़ें उनसे जुड़े कुछ अनसुने किस्से
अभिनेता वेद थापर को बुलाते थे लाले पुत्तर
राजा रेंचो धारावाहिक से चर्चा में आए भूमिया पुल निवासी अभिनेता वेद थापर ने बताया कि दिलीप कुमार से मुंबई में उनकी कई बार मुलाकात हुई। दिलीप साहब पख्तूनी भाषा में एक गाना गुनगुगाया करते थे, जो आज भी उन्हें याद है। पाकिस्तान के पेशावर में दिलीप कुमार के घर से एक गली छोड़कर वेद थापर का निवास था।
वेद ने बताया कि वह नेचुरोपैथी भी जानते थे। सायरा बानो ने एक बार उन्हें नाड़ी संबंधी विकार के लिए घर बुलाया था। पहली बार उन्होंने दिलीप कुमार को उसी समय देखा। सफेद लिबास में जिस शख्सीयत को देखने के लिए उनकी पलकें बेकरार थीं। दिलीप को देखते हुए वेद खड़े हुए तो उन्होंने कहा, बरखुरदार बैठे रहो। घर-परिवार की जानकारी होने पर वेद का दिलीप के परिवार से गहरा रिश्ता बन गया। सायरा बानो के प्रोडक्शन में एक सीरियल बनाया जा रहा था। इसमें हर कलाकार के जीवन के एक दिन को दर्शाया जाना था। सीरियल में वेद को करिश्मा कपूर के साथ मौका मिला लेकिन, किसी कारणवश एपिसोड पूरा नहीं हो पाया।
यादगार है साढ़े तीन घंटे की मुलाकात
वेद थापर ने बताया कि मुलाकातों का दौर आगे बढ़ा तो वह मुझे लाले पुत्तर के नाम से बुलाने लगे। इंडियन मोशन पिक्चर प्रोडयूसर एसोसिएशन में सलेक्शन के लिए दिलीप कुमार ने शुभकामना दी। कैमरे से न डरने के गुर भी सिखाए। इस बीच वेद थापर को दिलीप कुमार ने पख्तून भाषा में गाना सुनाया। बताया गया कि दिलीप कुमार उनके दादा और परिवार के अन्य सदस्यों को जानते थे।
शाहनवाज खान के हर चुनाव में प्रचार किया
दिलीप कुमार का मेरठ के जनरल शाहनवाज खान के परिवार से गहरा रिश्ता था। आजाद हिंद फौज के जनरल शाहनवाज ने छह बार सांसद का चुनाव लड़ा। हर बार दिलीप कुमार ने महीनों मेरठ में रहकर उनके साथ चुनाव प्रचार किया। जनरल शाहनवाज के पौत्र आदिल ने बताया कि पहली बार दिल्ली सागर अपार्टमेंट में उनकी दिलीप कुमार से भेंट हुई। मेरठ के रक्षापुरम निवासी आदिल तब मसूरी में चौथी कक्षा के छात्र थे। दादी करीम जान उन्हें दिल्ली ले गई थीं। आदिल ने बताया कि तब वहां सुनील दत्त भी मौजूद थे। गर्मी की छुट्टी उन्होंने दिलीप कुमार के साथ ही बिताईं। इसके बाद मेरठ, दिल्ली और मुंबई में उनकी कई बार मुलाकात हुई। आदिल ने बताया कि 1999 में दिलीप कुमार राज्यसभा सदस्य थे। बाद में दिलीप कुमार ने उन्हें जूहू चौपाटी पर घुमाया।
दिलीप के निकाह के गवाह थे शाहनवाज खान
दिलीप कुमार उर्फ यूसुफ खान का सायरा बानो से निकाह हुआ था। आदिल ने बताया कि निकाह में एक गवाह शाहनवाज खान भी थे। निकाह के बाद कई बार दिलीप कुमार मेरठ के सूरजकुंड स्थित कोठी पर आए।
दिलीप के प्यार में शेर मोहम्मद बन गया था शेरू रिक्शा वाला
महानायक दिलीप कुमार के चाहने वालों की लंबी लाइन है। लिसाड़ी गेट क्षेत्र के रसीद नगर ढलाईवाली गली निवासी शेर मोहम्मद ही नहीं, बल्कि उनके दादा और पिता भी दिलीप कुमार के प्रशंसक थे। शेर मोहम्मद के पिता भले ही दिलीप कुमार से नहीं मिल पाए थे लेकिन, शेर मोहम्मद ने दिलीप से मिलने के लिए खुद को शेर मोहम्मद उर्फ शेरू रिक्शा वाले के नाम से मुंबई में मशहूर किया। शेर मोहम्मद एक शानदार रिक्शा लेकर मुंबई पाली हिल में दिलीप के बंगले के आसपास घूमने लगे थे।
शेर मोहम्मद बताते हैं कि दिलीप कुमार उनके रिक्शे को देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने अपने आवास पर कई बार उनके साथ फोटो भी खिंचाए। दिलीप कुमार और उनकी पत्नी सायरा बानो ने उनकी मेहमाननवाजी भी की। इतना ही नहीं, फिल्म यमला पगला दिवाना में धर्मेंद्र के साथ एक रिक्शा के साथ पर्दे पर भी आने का अवसर दिया। शेर मोहम्मद ने बताया कि दिलीप कुमार ने उमरा जाते समय बेटे शेर अहमद को खुश होकर कुछ रुपये भी दिए थे।