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कोरोना से मौतों में मेरठ प्रदेश में दूसरे नंबर पर, संख्या 100 के पार, शासन के आंकड़ों में बड़ा अंतर

Mon, 27 Jul 2020 10:57 AM IST
Dimple Sirohi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Published by: Dimple Sirohi Updated Mon, 27 Jul 2020 10:57 AM IST
सार

आंकड़ेबाजी का खेल:
  • 104 है शासन के रिकॉर्ड में मौतों की संख्या
  • 86 मौत ही दिखा रहा स्थानीय स्वास्थ्य विभाग
  • कोरोना संक्रमितों की संख्या में भी फर्क 
  • शासनों के आंकड़ों में 1987 तो मेरठ के आंकड़ों में 1910 मरीज

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deaths from Corona: Meerut on second position in state, death toll goes across hundred, big difference in governance figures
coronavirus - फोटो : amar ujala

भले ही शासन और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में समन्वय न बन पा रहा हो। लेकिन मेरठ में कोरोना से होने वाली मौतों की संख्या शासन के हिसाब से 100 के पार पहुंच गई है। हालांकि स्थानीय स्वास्थ्य विभाग इसे शुक्रवार तक 86 ही बता रहा था। यही फर्क कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या में भी है। शुक्रवार तक शासन और स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में 18 लोगों की मौत और 77 मरीजों का फर्क चल रहा था।



दरअसल शासन और स्थानीय स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में यह अंतर लगातार चला आ रहा है और अधिकारी ऑडिट के बाद इसे सही दुरुस्त कराने की बात कहकर इसे टाल देते हैं। संक्रमित मरीजों की संख्या की बात करें तो शासन के आंकड़ों में 1987 मरीज है जबकि स्थानीय आंकड़ों में यह संख्या 1910 है। यह फर्क तो तब है, जबकि कई बार शासन और स्वास्थ्य विभाग अपने-अपने आंकड़े संशोधित कर चुके हैं। 

मौत में प्रदेश में दूसरा नंबर
प्रदेश में कोरोना से मौत में मेरठ दूसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर कानपुर नगर (159) और तीसरे पर आगरा (99) है। पिछले सप्ताह तक मौत में मेरठ आगरा से नीचे तीसरे नंबर पर था। यह बढ़ोतरी दुखद है।

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मरीजों में पांचवां नंबर
संक्रमित मरीजों की संख्या में मेरठ प्रदेश में 5वें नंबर पर है। उससे ऊपर गौतमबुद्धनगर 4554, कानपुर नगर 3344, लखनऊ 5422 और गाजियाबाद 4441है।  

लगातार उठ रहे सवाल
आंकड़ों की इस बाजीगरी पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। यह अंतर लगातार चला आ रहा है, जिसमें सुधार नहीं हो रहा है। पिछले दिनों मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए थे कि अब अगर पोर्टल पर गलत आंकड़े डाले तो प्राचार्य और अधीक्षक जिम्मेदार होंगे। लेकिन उसके बाद भी सुधार नहीं हुआ।

इसलिए आता है फर्क
सीएमओ डॉ. राजकुमार का कहना है कि जब मरीज मिलता है तो उसकी जानकारी पोर्टल पर अपलोड की जाती है। शासन के आंकड़ों में उसे दर्ज कर लिया जाता है। लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग उसकी पड़ताल करता है तो कुछ मरीज दूसरे जिलों के निकलते हैं। जिनका स्थानीय स्वास्थ्य विभाग अपने आंकड़ों में संशोधन कर लेता है। यह संशोधन कई बार पोर्टल पर नहीं हो पाता, जिस कारण यह फर्क नजर आता है। 
  
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