पिता ने लंबे समय तक सेना में रहकर देशसेवा की लेकिन उसके दोनों बेटे लश्कर के शागिर्द निकले। हैदराबाद से इमरान खान और नासिर खान को एनआईए की टीम ने गिरफ्तार किया, तो शामली तक खलबली मच गई। दरअसल, शामली निवासी भूतपूर्व सैनिक मूसा खान के दोनों बेटे इमरान और नासिर हैदराबाद में रेडीमेड कपड़ों का बिजनेस करते हैं। दोनों को दरभंगा ब्लास्ट मामले के आरोप में राष्ट्रीय जांच एजेंसी एनआईए ने गिरफ्तार किया है।
दरभंगा ब्लास्ट : पिता रिटायर्ड फौजी, बेटे लश्कर के आतंकी, मूसा खान ने एनआईए की कार्रवाई पर उठाए सवाल
बिहार के दरभंगा ब्लास्ट मामले में हैदराबाद से पकड़े गए नासिर और इमरान के पिता मूसा खान ने कहा कि यदि उसके बेटे देशद्रोही हैं तो उन्हें गोली मार दो और अगर निर्दोष है तो उन्हें छोड़ दिया जाए। मूसा ने देश की जांच एजेंसी की महिला अधिकारी पर अपने बेटों को फंसाने का आरोप भी लगाया है।
शामली में कैराना के मोहल्ला कायस्थवाड़ा निवासी रिटायर्ड फौजी मूसा खान ने बताया कि उसने साढ़े 15 साल सेना में नौकरी की है। कई लड़ाइयों में हिस्सा लिया। 1971 के युद्ध में वह बांग्लादेश भी गया। वह देश भक्त हैं। उसके बेटे देशद्रोही हैं तो उन्हें गोली मार दो नहीं तो उन्हें रिहा किया जाए।
दरअसल, मूसा खान के तीनों बेटों को एनआईए ने उठाया था। एक बेटे फारूख को छोड़ दिया, जिसने उन्हें फोन पर गिरफ्तारी की सूचना दी। मूसा का कहना है कि उसका बेटा नासिर देश की एक बड़ी जांच एजेंसी की महिला अधिकारी के लिए काम करता था। दो बार वह पाकिस्तान भी गया था। मूसा खान ने महिला अधिकारी पर अपने बेटों को फंसाने का आरोप लगाया है।
नेटवर्क खंगालने फिर आ सकती हैं जांच एजेंसियां
दरभंगा ब्लास्ट के बाद कैराना जांच एजेंसियों के रडार पर आ गया है। 17 जून को हुए ब्लास्ट में पार्सल पर शामली का नंबर मिलने के बाद जांच एजेंसियों ने यहां डेरा डाल लिया था। पूर्व में भी दो लोगों को उठाया गया था, लेकिन उनका क्या हुआ इस बारे में कोई खुलासा नहीं हुआ है।
कैराना निवासी सलीम उर्फ टुइया और कफील को कुछ दिन पहले उठाया गया था। सलीम को ट्रांजिट रिमांड पर टीम अपने साथ ले गई है। स्थानीय पुलिस दोनों के संबंध में किसी तरह की जानकारी होने से इनकार कर रही है।
अब हैदराबाद से कैराना निवासी नासिर और उसके भाई इमरान के पकड़े जाने के बाद फिर से जांच एजेंसियों के जिले में आने की संभावना बन गई है। माना जा रहा है कि पकड़े गए लोगों का नेटवर्क खंगालने के लिए जांच एजेंसियां जिले में आ सकती हैं।