सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस में पार्सल बुक कर उसमें ब्लास्ट कर उसे बर्निंग ट्रेन बनाने की तैयारी थी। यह सनसनीखेज खुलासा ब्लास्ट के आरोपी शामली निवासी सलीम ने एनआईए की पूछताछ में किया है। दरअसल, एक्सप्रेस को बर्निंग ट्रेन बनाने की साजिश पाकिस्तान में बैठे आईएसआई एजेंट इकबाल काना ने रची थी।
खुले राज : तो बर्निंग ट्रेन बन जाती दरभंगा एक्सप्रेस, ब्लास्ट के मास्टरमाइंड सलीम ने एनआईए की पूछताछ में किए कई बड़े खुलासे
कैराना के मोहल्ला आलखुर्द निवासी हाजी सलीम और कफील से एनआईए ने लंबी पूछताछ की है।
सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस को बर्निंग ट्रेन बनाने की साजिश रचने के बाद इसे अंजाम देने के लिए पाकिस्तान में बैठे आईएसआई के हैंडलर इकबाल काना ने कैराना के हाजी सलीम उर्फ सलीम अहमद को टास्क की पूरी जिम्मेदारी सौंपी थी।
उसे हिदायत दी गई कि वह कफील, हैदराबाद में बैठे नासिर और इमरान खान को भी अपने साथ जोड़ ले। सभी ने पूरी प्लानिंग के साथ इस काम को अंजाम दिया लेकिन गनीमत रही कि चलती ट्रेन के बजाए पार्सल में उतारते समय विस्फोट हुआ और आरोपियों के दरभंगा एक्सप्रेस को बर्निंग ट्रेन बनाने के मंसूबे फेल हो गए।
कैराना के मोहल्ला आलखुर्द निवासी हाजी सलीम और कफील से एनआईए ने लंबी पूछताछ की है। सूत्रों का कहना है कि हाजी सलीम के संबंध पाकिस्तान में आईएसआई के लिए काम कर रहे इकबाल काना से थे।
उसके इशारे पर ही सलीम ने सिकंदराबाद से दरभंगा जाने वाली ट्रेन में पार्सल में विस्फोटक (लिक्विड आईईडी) रखने की जिम्मेदारी ली थी। इसके बाद सलीम ने कफील के साथ ही नासिर और इमरान खान को अपने साथ मिलाया।
सूत्रों का कहना है कि नासिर ने लेडीज सूट के पार्सल में विस्फोटक की एक छोटी शीशी रखकर नासिर और इमरान की सहायता से इसे ट्रेन में रखवा दिया। बताया गया कि बम कम ताकत का था। उसे केवल पार्सल में आग लगाने के लिए इस्तेमाल किया जाना था।
इससे पार्सल की बोगी में आग लग जाती और तेज रफ्तार से चल रही पूरी ट्रेन में फैल जाती। सिकंदराबाद-दरभंगा एक्सप्रेस को बर्निंग ट्रेन बनाकर हजारों यात्रियों की जान लेने के लिए यह पूरी साजिश रची गई थी। लेकिन उनकी साजिशें तब फेल हो गई जबकि पार्सल में ब्लास्ट ट्रेन में न होकर उसे स्टेशन पर उतारते समय हुआ।
कौन है मास्टरमाइंड सलीम का गुरू इकबाल काना
कैराना के मूल निवासी इकबाल काना ने पाकिस्तान में अपना नेटवर्क खड़ा कर लिया है। वह शुरुआत में सोने की तस्करी और बाद में नकली नोटों और असलहा का कारोबार करता था।
1995 में पुलिस का दबाव बढ़ने व इकबाल अपने परिवार के साथ पाकिस्तान भाग गया था। वह पाकिस्तान में अपनी रिश्तेदारी में जाने वाले पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लोगों से संपर्क करता रहा है और उन्हें राष्ट्रविरोधी गतिविधियों में लिप्त कराता है। सलीम भी इकबाल के संपर्क में था।