दरभंगा विस्फोट मामले में पकड़े गए सलीम उर्फ टुइया का कनेक्शन पाकिस्तान में रह रहे इकबाल काना से मिला है। माना जा रहा है कि पाक की खुफिया एजेंसी आईएसआई ने इकबाल के जरिए ही सलीम से संपर्क साधा है। इसका पता लगने पर कैराना में खुफिया एजेंसियों ने अन्य संपर्कों की भी तलाश शुरू कर दी है।
दरभंगा में विस्फोट मामला : काना के इशारे पर सलीम ने रची साजिश, कैराना में आईएसआई का नेटवर्क तलाश रहीं खुफिया एजेसियां
इकबाल काना कभी कैराना में अपने पिता के साथ केले की ठेली लगाता था। 90 के दशक में वह पाकिस्तान जाने-आने वालों के जरिए सोने की तस्करी करने लगा। पुलिस का दबाव बढ़ने पर पाकिस्तान भाग गया और वहां आईएसआई के संपर्क में आकर राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का संचालन करना शुरू कर दिया।
दरअसल, इकबाल काना 1995 में पिस्टल की खेप पकड़े जाने के बाद फरार हो गया था। बाद में पता लगा कि वह पुलिस का दबाव बढ़ने पर परिवार समेत पाकिस्तान भाग गया है। उसके बाद से वह कैराना नहीं लौटा और पाकिस्तान में आईएसआई के संपर्क में आ गया। उसने पाकिस्तान से ही राष्ट्र विरोधी गतिविधियों का संचालन करना शुरू कर दिया। इसके लिए उसने पाकिस्तान रिश्तेदारी में जाने-आने वालों से संपर्क कर अपने साथ जोड़ना शुरू कर दिया।
सूत्रों का कहना है कि सलीम उर्फ टुइया भी इकबाल काना के संपर्क में है। इसका पता लगते ही खुफिया एजेंसियों ने कैराना में उसकी जड़े तलाशनी शुरू कर दी हैं। माना जा रहा है कि कुछ और लोग भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं जिनकी कुंडली खंगाली जा रही है। कुछ लोगों के बैंक खातों की भी गोपनीय ढंग से जांच की जा रही है।
पिता के साथ केले का ठेला लगाता था इकबाल
इकबाल काना कभी कैराना में अपने पिता के साथ केले की ठेली लगाता था, लेकिन महत्वाकांक्षी स्वभाव के इकबाल को यह काम पसंद नहीं था। उसने ऐसे लोगों के पासपोर्ट और वीजा बनवाने में मदद करने का काम शुरू किया, जिनकी रिश्तेदारी पाकिस्तान में थी। 90 के दशक में वह पाकिस्तान जाने-आने वालों के जरिए सोने की तस्करी करने लगा।
बताया गया कि उस समय पाक से डिस्को कपड़ा और मिर्जा चप्पल आती थी। इन कपड़ों और चप्पलों में छिपाकर पाकिस्तान से सोना यहां लाया जाता था। जब दोनों देशों में सोने के भाव का अंतर कम हो गया तो इकबाल ने हथियारों और जाली करेंसी की तस्करी शुरू कर दी। 1995 में पिस्टल की खेप के साथ उसका एक साथी पकड़ा गया था, जबकि इकबाल फरार हो गया था। पुलिस का दबाव बढ़ने पर वह अपने परिवार को लेकर पाकिस्तान भाग गया था।
कैराना के कई लोगों के रिश्तेदार पाकिस्तान में
पुलिस सूत्रों के अनुसार कैराना के कई लोगों की रिश्तेदारी पाकिस्तान में है। नकली नोटों के सौदागर कैराना के इकबाल उर्फ काना ने पाकिस्तान में बड़ा नेटवर्क खड़ा किया। वह अभी तक कैराना से जुड़ा था, जबकि कई साल से वह पाकिस्तान में परिवार के साथ रह रहा है। रिश्तेदारी की आड़ में ऐसे कारनामे करने वाले संदिग्ध लोगों की जांच की जा रही है।
कैराना का ही दिलशाद मिर्जा भी पाकिस्तान में रहकर देशविरोधी गतिविधियों को अंजाम दे रहा है। इनके अलावा फातिमा सहित कई लोग कैराना से जुड़े रहे। अब कैराना के सलीम उर्फ टुइया का पाकिस्तान के कई लोगों से संबंध होने की बात सामने आई है। वहीं शामली में म्यांमार निवासी चार युवकों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था। 2015 में थानाभवन में बांग्लादेशी यामीन के अवैध रूप से रहने का खुलासा होते ही वह फरार हो गया था।
कई लोगों के बैंक खातों की जुटाई जा रही जानकारी
17 जून को दरभंगा ब्लास्ट में आईएसआई ने करोड़ों रुपये की फंडिंग की है। बताया गया कि आईएसआई ने सारी फंडि़ंग कैराना के दोनों युवकों के माध्यम से की है। इनके मोबाइल की कॉल डिटेल्स भी सुरक्षा एजेंसियों ने खंगाली है।
कैराना के युवकों की आईएसआई से क्या-क्या बातचीत हुई और उनकी आगे की प्लानिंग क्या है, इसका पता लगाने का सुरक्षा एजेंसियां प्रयास कर रही है। सुरक्षा एजेंसियों ने पुलिस के माध्यम से कैराना के कई लोगों के बैंक खातों की भी जानकारी जुटाने का प्रयास किया है।