अरे मेरे भाई... मेरे प्यारे, तू तो 19 जून को आने वाला था ना। कहके गया था इस बार जहाज से आऊंगा, पर तू तो हमें ही छोड़ गया रे। शहीद सतेंद्र की फोटो अपने कलेजे से लगाकर उसकी दोनों बहनें फूट फूटकर रोती हुईं यही बात दोहरा रही थी। उन्हें बिलखती देख वहां मौजूद हर किसी का कलेजा भी रो रहा था।
मेरे प्यारे भाई... तू तो 19 को जहाज से आने वाला था, फोटो कलेजे से लगाकर रोती बहनें, तस्वीरें
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सतेंद्र की शहादत की खबर आते ही परिवार पर मानो गम का पहाड़ टूट गया था। गुरुवार को घर के बरामदे में सतेंद्र की पत्नी सोनिया, उसकी दो बहनें रेखा और राखी बुरी तरह बिलख रही थीं। उनकी बहनें बारी बारी से सतेंद्र का फोटो अपने कलेजे से लगाकर बिलख रही थी। छोटी बहन राखी बार बार कह रही थी कि भाई तू तो 19 को जहाज से आने की बात कहकर गया था, पर तू तो हमें ही छोड़ गया। दोनों बहनों का हाल देख वहां मौजूद हर किसी की आंखों से आंसू बह निकले।
परिजनों के अनुसार सतेंद्र 10 मार्च को होली की 20 दिन की छुट्टी पर आया था। 30 तारीख को जब वो गया तो अपनी बहन राखी से कहकर गया था कि वो जून में फिर से छुट्टी लेकर आएगा। कुछ दिन पहले उससे बात हुई तो उसने बताया था कि अधिकारी ने उसकी छुट्टी को मंजूरी दे दी है।
छुट्टी हो गई थी मंजूर, परिवार वाले थे बहुत खुश
बहन राखी ने बताया कि सतेंद्र छुट्टी लेकर ट्रेन से घर आता था। पहलगांव से गांव तक आने ओर जाने में ही उसके चार पांच दिन लग जाते थे। पत्नी और बहनें एक महीने की छुट्टी पर आने को कहती थी, लेकिन इतनी लंबी छुट्टी मिलती नहीं थी। इस बार उसकी बहनों ने उसे हवाई जहाज से आने को कहा था। हवाई जहाज से गांव तक पहुंचने में केवल सात आठ घंटे ही लगते थे। 19 जून से उसकी छुट्टी मंजूर हुई तो उसने भी बहनों से कहा था कि वो हवाई जहाज से ही आएगा, लेकिन शायद भगवान को कुछ ओर ही मंजूर था। इसलिए ही उसकी बहनें बार बार इस बात को याद कर फूट फूटकर रो रही हैं।
सतेंद्र के कंधों पर थी परिवार की जिम्मेदारी
सतेंद्र का गांव में दो कमरे और एक बरामदे का मकान है। सतेंद्र के पिता मुनीराम, सतेंद्र का बड़ा भाई जितेंद्र और छोटा केशव इधर, उधर मजदूरी करके ही परिवार चला रहे हैं। घर में छोटी बहन राखी अविवाहित है। उसकी भी शादी की चिंता है। आमदनी सीमित है। ऐसे में परिवार की पूरी जिम्मेदारी सतेंद्र के ही कंधों पर थी। सतेंद्र ही परिवार को महीने में खर्चा भेजता था।