भूपेंद्र बाफर ने फिर से वेस्ट में जयराम की दुनिया में कदम रख दिया। इसके चलते बाफर के राजनीतिक लोगों से भी गहरे संबंध हो गए। शायद यही वजह थी कि जमानत पर छूटने के बाद उसको राजनीतिक दबाव में पुलिस के दो गनर दिए गए। इसका खुलासा बाफर की गिरफ्तारी के बाद हुआ। गैंग को एक्टिव करने के लिए बाफर में योगेश भदौड़ा और ऊधम सिंह गैंग के कई बदमाश भी अपने गैंग में शामिल कर लिए।
इनामी भूपेंद्र बाफर ने पश्चिम के जरायम की दुनिया में फिर से रखा कदम, इसलिए मिले थे दो गनर
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दो साल पहले भूपेंद्र बाफर कोर्ट से जमानत पर छूटा तो उसके बाद भूपेंद्र बाफर ने जरायम की दुनिया के खिलाड़ी सुशील मूंछ से अपनी दुश्मनी मानने की चर्चाओं में फिर से मेरठ, मुजफ्फरनगर, शामली समेत कई जिलों में अपराध की दुनिया में साम्राज्य तैयार कर लिया।
पुलिस के अनुसार, मूंछ को पुलिस कस्टडी में मारने के लिए बाफर ने अपने करीबी रोहित उर्फ सांडू को छुड़वाया। आरोप है कि सुशील मूंछ के बेहद करीबी माने जाने वाले यशपाल राठी की हत्या भी रोहित सांडू ने की थी। मुजफ्फरनगर पुलिस ने बाफर की तलाश में जाल बिछाया और एक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
गनर पर शासन को भेजी रिपोर्ट
अमर उजाला ने प्रमुखता से प्रकाशित किया कि बाफर को कैसे गनर मिले तो इस पर शासन ने रविवार को रिपोर्ट तलब कर ली। इस संबंध में पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बाफर के पास दो गनर थे। इसकी जानकारी होने पर एक बार तो मुजफ्फरनगर पुलिस पीछे हट गई थी। उसके बाद मुजफ्फरनगर पुलिस ने एसएसपी मेरठ से बात की।
एसएसपी अजय साहनी ने दोनों गनर तत्काल वापस बुला लिए। जिसके बाद बाफर की गिरफ्तारी कराई गई। एसएसपी अजय साहनी का कहना कि गनर दो महीने पहले दिए गए थे। डीएम अनिल ढींगरा, तत्कालीन एसएसपी नितिन तिवारी और एलआईयू की संस्तुति पर बाफर को गनर मिले। इस मामले की रिपोर्ट लखनऊ भेजी गई है।