मेरठ जिले से गुजरने वाली काली नदी के पुनर्जीवन का मंगल आगाज हो गया है। अधिकारियों ने मंगलवार को रजपुरा ब्लाक के गांव गांवड़ी में पहुंचकर काली नदी को संवारने का कार्य किया। कमिश्नर, जिलाधिकारी, सीडीओ, डीएफओ ने नदी किनारे पौधे लगाए। वहीं मनरेगा से जुड़े 50 श्रमिकों, जेसीबी, पोकलेन मशीनों को कार्य में लगा दिया है।
तस्वीरें: कमिश्नर सुरेंद्र सिंह ने किया काली नदी के पुनर्जीवन का मंगल आगाज, पढ़िए ये खास बातें
वहीं, अगले चरण में वन महोत्सव के दौरान पौधरोपण, वेटलेंड बनाने की योजना है। इस चरण को पूरा करने के बाद नंगली गांव से श्रमदान कार्य शुरू किया जाएगा। इस कार्य का नाम काली नदी सेवा दिया गया है।
मेरठ जिले में काली नदी की लंबाई 40 किलोमीटर है। काली नदी मुजफ्फरनगर जिले के खतौली तहसील के अंतवाड़ा गांव से शुरू होकर मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, कासगंज, फरुर्खाबाद होते हुए कन्नौज में गंगा नदी में मिल जाती है। इसकी कुल लंबाई 600 किलोमीटर है। मेरठ में नदी सरधना तहसील के नंगली गांव से प्रवेश करते हुए खरखौदा ब्लाक के अतराड़ा गांव से होते हुए हापुड़ में प्रवेश करती है। नीर फाउंडेशन के संस्थापक रमन त्यागी ने बताया कि मेरठ शहर से पहले तक नदी प्रदूषित नहीं है। ये मेरठ शहर के बाद सबसे अधिक प्रदूषित है। इसमें शहर का पूरा सीवरेज डाला जा रहा है।
गांवड़ी गांव के नदी पुल से शुरुआत
इसकी खुदाई की शुरुआत मेरठ-किला परीक्षितगढ़ मार्ग पर गांवड़ी गांव के नदी के पुल से होगी। इसमें सिंचाई, वन, लघु, ब्लाक, राजस्व आदि अधिकारी शामिल रहेंगे। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं को भी श्रमदान के लिए प्रेरित किया गया है। इस कार्य में चार जेसीबी, 200 सफाई कर्मचारी, एक पोर्कलेन मशीन से 15 दिन कार्य किया जाएगा।
अब पंचायत घर में शुरू हुआ रेन वाटर हार्वेंस्टिंग सिस्टम
मुख्य विकास अधिकारी की निगरानी में लगातार प्राइमरी स्कूलों, पंचायत घरों में रेन वाटर हार्वेंस्टिंग लगाने की शुरुआत हो गई है। रजपुरा ब्लॉक के कस्तला गांव के प्राइमरी स्कूल में रेन वाटर हार्वेंस्टिंग सिस्टम लगाने के शुभारंभ के बाद अब मवाना ब्लाक के पंचायत घर में शुरुआत की गई है। गांव नंगला कतार में बोरिंग कार्य शुरू कर दिया गया है।