Case of the female student's murder: रोहटा क्षेत्र में अनुसूचित जाति की छात्रा की अपहरण कर हत्या के मामले ने तूल पकड़ लिया है। शुक्रवार को न्याय की गुहार लेकर पीड़ित परिवार से मिलने जा रहे नगीना सांसद चंद्रशेखर को पुलिस ने सिवाया टोल प्लाजा पर बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। रोके जाने के बाद सांसद अपने समर्थकों के साथ सड़क पर ही धरने पर बैठ गए। पूरा दिन पुलिस-प्रशासन और सांसद के बीच कशमकश का दौर चलता रहा।
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मेरठ में सांसद चंद्रशेखर।
- फोटो : अमर उजाला
शुक्रवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे जैसे ही सांसद चंद्रशेखर का काफिला सिवाया टोल प्लाजा पहुंचा, पुलिस ने उन्हें आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी। सांसद ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन बताते हुए वहीं धरना शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था पूरी तरह विफल है और अनुसूचित जाति के लोगों पर अत्याचार बढ़ रहे हैं।
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टोल प्लाजा पर लगा जाम।
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चंद्रशेखर ने कहा कि न्याय की मांग को लेकर शांतिपूर्ण धरना दे रहे लोगों पर लाठीचार्ज किया गया। जिले के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ अभद्र व्यवहार कर रहे हैं। हिरासत में लिए गए एक व्यक्ति के साथ भी मारपीट की। यदि इस प्रकार की घटनाओं पर रोक नहीं लगी तो जनता का पुलिस व्यवस्था से विश्वास उठ जाएगा।
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टोल प्लाजा पर आसपा कार्यकर्ताओं की भीड़।
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हालात की गंभीरता को देखते हुए एसपी देहात अभिजीत मौके पर पहुंचे और सांसद से लंबी बातचीत की। प्रशासनिक पहल के बाद, दोपहर करीब तीन बजे टोल प्लाजा के कंट्रोल रूम में सांसद चंद्रशेखर और पीड़ित परिवार की मुलाकात कराई गई। लगभग दो घंटे चली इस वार्ता में परिवार ने घटनाक्रम और अपनी पीड़ा विस्तार से रखी। इसके कुछ समय बाद तक सांसद धरने पर बैठे रहे। बाद में शाम साढ़े छह बजे धरना समाप्त कर सांसद अपने काफिले के साथ वापस लौटे।
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एंबुलेंस भी फंस गई।
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पीड़ित परिवार का दर्द और सुरक्षा की मांग
सांसद चंद्रशेखर ने बताया कि मुलाकात के दौरान पीड़ित परिवार ने उन्हें बताया कि मृतका की मां और बहन पर भी पुलिस ने उस समय लाठी बरसाई थी, जब वे न्याय की गुहार लगा रही थीं। पीड़ित परिवार ने सांसद को बताया कि वे खौफ के साये में जी रहे हैं और उन्हें गांव में धमकाया जा रहा है। सांसद ने प्रशासन के समक्ष मांग रखी कि परिवार को शहर में सुरक्षित आवास उपलब्ध कराया जाए। पीड़ित परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। परिजनों को सरकारी नौकरी दी जाए।