मेरठ के गंगानगर में फिटकरी गांव में टायर गलाने की फैक्टरी में मंगलवार सुबह बॉयलर में इतना जोरदार धमाका हुआ कि बॉयलर के पास काम कर रहे लोग बेहोश हो गए और कुछ दूरी पर काम कर रहे लोगों को कान कुछ देर के लिए सुन्न पड़ गए। चारों ओर राख का अंधेरा छा गया। आसपास से लोग पहुंचे तो घुंए में लोगों को कुछ समझ में नहीं आया। आधे घंटे बाद जब धुआं छटा तो दो लोगों को क्षत-विक्षत शव पड़े थे। बाकी घायल बेहोश पड़े थे।
बॉयलर हादसा: मजदूरों के शवों का गांव में हुआ अंतिम संस्कार, मालिकों पर नहीं कोई मुकदमा
फैक्टरी में मौजूद मोनू के मुताबिक तेज आवाज से आसपास की फैक्टरियों में काम करने वाले लोग वहां पहुंच गए। आधे घंटे बाद जब राख बैठी तो कुछ दिखना शुरू हुआ। बॉयलर का करीब 200 क्विंटल का ढक्कन अलग पड़ा था। ढक्कन से जुड़ी मशीन करीब 100 फीट की दूरी पर पड़ी थी। बॉयलर के पास राख में लिपटा शंकरलाल व प्रवीण पड़े थे। शंकरलाल के सिर का कुछ हिस्सा गायब था और उसकी मौत हो चुकी थी।
यहीं, हाल प्रवीण के शव का था। कुछ कदम दूर दिनेश, शैंकी और उसके पिता सोहनपाल घायल पड़े थे। मजदूरों ने फैक्टरी मालिक को सूचना दी। उसके बाद जब घटना बताने के लिए अन्य कर्मचारियों ने फोन करने शुरू किए तो दोनों मालिकों ने मोबाइल बंद कर लिए।
कर्मचारियों ने पुलिस व एंबुलेंस हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किए। करीब एक घंटे बाद साढ़े छह बजे एंबुलेंस पहुंच सकी। घायलों को गंगानगर स्थित एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। साथी कर्मचारियों के मुताबिक करीब साढ़े सात बजे इंचौली पुलिस फैक्टरी पहुंची। तब तक परिजन प्रवीण के शव को गेट के पास तक ले आए।
अधिकारी ध्यान देते तो नहीं जाती मजदूरों की जान
फिटकरी गांव में टायर फैक्टरी में बॉयलर फटने से हुए हादसे के लिए अधिकारी भी कम जिम्मेदार नहीं हैं। छह साल पहले फैक्टरी से क्षेत्र में फैल रहे प्रदूषण को लेकर फैक्टरी को बंद किए जाने की मांग पर जांच के बाद फैक्टरी को बंद कराया गया था, लेकिन नौ माह बाद फैक्टरी का दोबारा संचालन शुरू हो गया। और पांच साल से फैक्टरी चलती रही और अधिकारी मुंह फेरे रहे। और मंगलवार को हुए हादसे में दो लोगों की मौत हो गई।
फिटकरी गांव के रास्ते पर दुर्गा एंटरप्राइजेज के नाम से फैक्टरी है। यहां टायर गलाने के दौरान निकलने वाले जहरीले धुएं व गैस सहित राख से आसपास के ग्रामीणों का बुरा हाल है। कई बार फैक्टरी बंद कराने की मांग की गई। अधिकारियों को अर्जी दी गई। जांच के बाद बंद भी हुई। परंतु सत्तापक्ष के प्रभाव से कुछ माह बाद ही फिर शुरू हो गई।
आसपास के ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होंने फैक्टरी शुरू करने का विरोध किया तो उनके खिलाफ फैक्टरी मालिक ने इंचौली थाने में मुकदमे दर्ज करा दिए। जिसका केस वह अभी तक लड़ रहे हैं। दौराला निवासी भाकियू अराजनैतिक के जिलाध्यक्ष नवाब सिंह अहलावत ने बताया कि 11 मई 2018 को फैक्टरी से फैल रहे प्रदूषण को लेकर प्रदूषण कार्यालय पर धरना दिया गया था।