किसानों,मजदूरों और गरीबों की हक की लड़ाई के लिए भारतीय किसान यूनियन ने धरने और आंदोलन तो बहुत किए, लेकिन उन्होंने पदयात्रा पहली बार की है। हजारों कार्यकर्ताओं के साथ भाकियू पदाधिकारी हरिद्वार से किसान क्रांति पदयात्रा की शुरुआत करते हुए दिल्ली की और बढ़ रहे हैं। इस पदयात्रा में ऐसे भी कार्यकर्ता शामिल हैं जो पिछले 50 साल से महेंद्र सिंह टिकैत से जुड़े रहकर कई बड़े आंदोलनों में भाग ले चुके हैं।
सिर पर पगड़ी साथ में हुक्का, सड़कें बनी बिछौना, हक के लिए आगे बढ़ रहे किसान, देखें ताजा तस्वीरें
ये किसानों के हक की लड़ाई है
अस्सी के दशक में हुए आंदोलन की दिलाई याद
सड़क ही बन गई किसानों का बिस्तर
भारतीय किसान यूनियन की किसान क्रांति यात्रा का मेरठ पहुंचते ही भव्य स्वागत किया गया। शुक्रवार की रात किसानों का सिवाया टोल प्लाजा पर पड़ाव था। रात लगभग 11 बजे भी सिवाया टोल प्लाजा के पास पूरी हलचल बनी हुई थी। बहुत से किसान अपने ट्रैक्टरों में लगे स्पीकरों में रागिनी का आनंद उठा रहे थे तो कुछ किसान खुद ही रागिनी व देश भक्ति गीत गा रहे थे। इसके अलावा हुक्के की गुड़गुड़ भी जगह जगह सुनाई दे रही थी। चारों ओर जैसे मेले का माहौल बना हुआ था। इसके अलावा बहुत से किसान दिन भर की थकान के बाद सड़क को ही बिस्तर बनाकर सो रहे थे। सिवाया टोल प्लाजा के पास बने मैदान में रुके किसान विभिन्न साधनों से मनोरंजन कर रहे थे। टोल के मैदान के अलावा यात्रा में शामिल महिलाओं का भगवती कॉलेज में ठहरने का इंतजाम किया गया था।
बेसन का हलवा,खीर व कचौड़ी की व्यवस्था
शुक्रवार को मेरठ पहुंची भाकियू की किसान क्रांति यात्रा का पड़ाव सिवाया टोल प्लाजा पर रहा। इस दौरान यात्रा में शामिल रहे किसानो के लिए सकौती गांव से हलवा आया तो भराला, पनवाड़ी से आलू-पूरी बनकर पहुंची। मेरठ भाकियू के युवा जिलाध्यक्ष नवाब सिंह अहलावत ने बताया कि दौराला, चिंदौड़ी, सुरानी, सिवाया, अलीपुर, इकलौता आदि गांवों के लोगों ने मिलकर सामान एकत्रित किया और टोल प्लाज पर ही टेंट लगाकर हलवाई ने आलू की सब्जी और पूरी बनाई। देर रात दौराला से किसानो के लिए चना-बाखली पहुंची। जिसके बाद सुबह का नाश्ता कराने के बाद किसानों को आगे के लिए रवाना किया गया।