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सिर पर पगड़ी साथ में हुक्का, सड़कें बनी बिछौना, हक के लिए आगे बढ़ रहे किसान, देखें ताजा तस्वीरें

Sat, 29 Sep 2018 07:18 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मेरठ Updated Sat, 29 Sep 2018 07:18 PM IST
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Bhakiyu Kisan Yata: farmers are moving ahead for their rights with hukka and turban
भाकियू किसान यात्रा - फोटो : अमर उजाला

किसानों,मजदूरों और गरीबों की हक की लड़ाई के लिए भारतीय किसान यूनियन ने धरने और आंदोलन तो बहुत किए, लेकिन उन्होंने पदयात्रा पहली बार की है। हजारों कार्यकर्ताओं के साथ भाकियू पदाधिकारी हरिद्वार से किसान क्रांति पदयात्रा की शुरुआत करते हुए दिल्ली की और बढ़ रहे हैं। इस पदयात्रा में ऐसे भी कार्यकर्ता शामिल हैं जो पिछले 50 साल से महेंद्र सिंह टिकैत से जुड़े रहकर कई बड़े आंदोलनों में भाग ले चुके हैं।


 

ये किसानों के हक की लड़ाई है

Bhakiyu Kisan Yata: farmers are moving ahead for their rights with hukka and turban
भाकियू किसान यात्रा - फोटो : अमर उजाला
किसान नेता और भारतीय किसान यूनियन के संस्थापक महेंद्र सिंह टिकैत के निधन के बाद भाकियू अपनी ताकत को ओर बढ़ा रही है। किसानों की मांगों को लेकर राज्य व केंद्र सरकार के खिलाफ पिछले तीन दशक से भाकियू ने कई बड़े धरने देकर सरकारों के खिलाफ आंदोलन किया। पदयात्रा में शामिल मुजफ्फरनगर के सिसौली निवासी विक्रम सिंह ने बताया कि वह 50 साल से महेंद्र सिंह टिकैत से जुड़े थे। अब नरेश टिकैत और राकेश टिकैत किसानों के हक की लड़ाई लड़ रहे हैं।

 

अस्सी के दशक में हुए आंदोलन की दिलाई याद

Bhakiyu Kisan Yata: farmers are moving ahead for their rights with hukka and turban
भाकियू किसान यात्रा - फोटो : अमर उजाला
उन्हें याद है कि अक्तूबर 1988 में महेंद्र सिंह टिकैत ने किसानों की मांग और गन्ना समर्थन मूल्य को लेकर एक सप्ताह तक धरना दिया। उस समय करीब एक लाख किसान दिल्ली में जुटे थे। सिसौली निवासी वेदपाल सिंह बताते हैं कूरमखेड़ा बिजली घर पर दिया गया धरना आज भी उनके जेहन में ताजा है। उस समय मुख्यमंत्री रहे वीर बहादुर सिंह ने बढ़ाई गई बिजली दर का फैसला वापस कर दिया था। मुकंदपुर निवासी अरुण प्रधान बताते हैं कि किसानों की लड़ाई में ही उनकी जिंदगी बीत गई। 1988 में मेरठ कमिश्नरी पर एक माह तक हजारों ने धरना दिया था। 
 
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सड़क ही बन गई किसानों का बिस्तर

Bhakiyu Kisan Yata: farmers are moving ahead for their rights with hukka and turban
भाकियू किसान यात्रा - फोटो : अमर उजाला

भारतीय किसान यूनियन की किसान क्रांति यात्रा का मेरठ पहुंचते ही भव्य स्वागत किया गया। शुक्रवार की रात किसानों का सिवाया टोल प्लाजा पर पड़ाव था। रात लगभग 11 बजे भी सिवाया टोल प्लाजा के पास पूरी हलचल बनी हुई थी। बहुत से किसान अपने ट्रैक्टरों में लगे स्पीकरों में रागिनी का आनंद उठा रहे थे तो कुछ किसान खुद ही रागिनी व देश भक्ति गीत गा रहे थे। इसके अलावा हुक्के की गुड़गुड़ भी जगह जगह सुनाई दे रही थी। चारों ओर जैसे मेले का माहौल बना हुआ था। इसके अलावा बहुत से किसान दिन भर की थकान के बाद सड़क को ही बिस्तर बनाकर सो रहे थे। सिवाया टोल प्लाजा के पास बने मैदान में रुके किसान विभिन्न साधनों से मनोरंजन कर रहे थे। टोल के मैदान के अलावा यात्रा में शामिल महिलाओं का भगवती कॉलेज में ठहरने का इंतजाम किया गया था।

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बेसन का हलवा,खीर व कचौड़ी की व्यवस्था

Bhakiyu Kisan Yata: farmers are moving ahead for their rights with hukka and turban
भाकियू किसान यात्रा - फोटो : अमर उजाला

शुक्रवार को मेरठ पहुंची भाकियू की किसान क्रांति यात्रा का पड़ाव सिवाया टोल प्लाजा पर रहा। इस दौरान यात्रा में शामिल रहे किसानो के लिए सकौती गांव से हलवा आया तो भराला, पनवाड़ी से आलू-पूरी बनकर पहुंची। मेरठ भाकियू के युवा जिलाध्यक्ष नवाब सिंह अहलावत ने बताया कि दौराला, चिंदौड़ी, सुरानी, सिवाया, अलीपुर, इकलौता आदि  गांवों के लोगों ने मिलकर सामान एकत्रित किया और टोल प्लाज पर ही टेंट लगाकर हलवाई ने आलू की सब्जी और पूरी बनाई। देर रात दौराला से किसानो के लिए चना-बाखली पहुंची। जिसके बाद सुबह का नाश्ता कराने के बाद किसानों को आगे के लिए रवाना किया गया।   

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