अयोध्या प्रकरण: फैसले को लेकर मेरठ प्रशासन चौकन्ना, सोशल मीडिया पर न करें ये गलती, हो सकती है जेल
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सोशल मीडिया के लिए जारी की गई ये एडवाइजरी
- सभी कॉल की रिकार्डिंग होगी, जो सुरक्षित रहेंगी।
- व्हाट्सएप, फेसबुक, ट्विटर समेत सभी सोशल मीडिया की निगरानी होगी।
- आपकी डिवाइस को मंत्रालय के सिस्टम से जोड़ा जाएगा।
- कोई गलत मेसेज किसी को मत भेजिए, सभी को इस बारे में बताएं।
- कोई आपत्तिजनक पोस्ट या वीडियो आप रिसीव करते हैं, राजनीति या वर्तमान स्थिति पर, सरकार या प्रधानमंत्री के खिलाफ तो सेंड न करें।
- किसी राजनीतिक या धार्मिक मुद्दे पर आपत्तिजनक मेसेज लिखना या भेजना अपराध है। ऐसा करने पर बिना वारंट के गिरफ्तारी हो सकती है।
- पुलिस एक नोटिफिकेशन निकालेगी। साइबर अपराध पर एक्शन लिया जाएगा।
- यह बहुत ही गंभीर प्रकरण है। व्हाट्सएप के सभी ग्रुप मेंबर और एडमिन इस विषय पर गहराईं से सोचें।
- कोई गलत मेसेज मत भेजिए। सभी को सूचित करें तथा इस विषय पर ध्यान रखें।
- सभी ग्रुप ज्यादा सतर्क व सावधान रहें। सभी को इससे अवगत भी कराएं।
फैसले के दिन संगानों के साये में रहेगा मेरठ
अयोध्या प्रकरण में सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले पुलिस-प्रशासन तैयारियों को पूरा करने में जुटा है। पूरे जिले को जहां आठ जोन और 31 सेक्टरों में बांटा गया है। वहीं, निर्णय वाले दिन के लिए रैपिड एक्शन फोर्स, आरआरएफ और पीएसी की दस कंपनी मांगी गई हैं।
जिले में चिह्नित किए गए 106 संवेदनशील स्थानों पर पीएसी और आरएएफ द्वारा मार्च निकाला जा रहा है। 12 नवंबर को मखदूमपुर और गढ़ गंगा मेले से तीन हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी ड्यूटी से लौट आएंगे। जिसके बाद जिले के सभी संवेदनशील स्थानों पर पुलिस, आरएएफ, आरआरएफ और पीएसी को तैनात कर दिया जाएगा।