पश्चिमी यूपी का आतंकी कनेक्शन कोई नया नहीं है। यहां लगातार कई जिलों से एनआई और एटीएस पहले भी आतंकियों को गिरफ्तार कर चुकी हैं। चिंताजनक बात यह है कि इन आतंकियों का लक्ष्य अब पश्चिमी यूपी के युवा हैं, जिन्हें उनके ही देश के खिलाफ अपने नापाक मंसूबों को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल किया जा सके।
जी हां, शुक्रवार को सहारनपुर से गिरफ्तार किए गए दोनों आतंकियों की गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने चौंकाने वाला खुलासा किया है। एटीएस के मुताबिक पाकिस्तान में बैठे जैश-ए-मोहम्मद के आकाओं द्वारा खुद को सुरक्षित रखते हुए एक खास तरह से वेस्ट के जिलों में रहने वाले युवाओं को आतंक की ट्रेनिंग दी जा रही है। आगे जानें आखिर क्या है वह तरीका जिससे पश्चिमी यूपी के युवा दूर बैठकर आतंकी गतिविधियों से लगातार जोड़े जा रहे हैं: -
पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के आतंकियों की इंटरनेट कॉलिंग से वेस्ट के जिलों में ‘क्लास’ चलती है। फर्जी आईडी पर सिम लेना और फिर अपना नेटवर्क फैलाना आतंकियों का प्लानिंग का हिस्सा है। देवबंद में पकड़े दोनों आतंकियों से कई मोबाइल फोन और सिम बरामद हुए है। जिन्हें जांच के लिए फोरेंसिक लैब भेजा जाएगा।
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आतंकी गिरफ्तार
- फोटो : अमर उजाला
यूपी एटीएस ने शुक्रवार को देवबंद में जैश के दो आतंकियों शाहनवाज और आकिब को गिरफ्तार किया। एटीएस का दावा है कि आतंकियों ने सहारनपुर, मेरठ, मुजफ्फरनगर, हापुड़, बुलंदशहर समेत वेस्ट यूपी के जिलों में नेटवर्क फैलाने के लिए इंटरनेट कॉलिंग का इस्तेमाल किया है।
आसानी से ट्रेस नहीं होती इंटरनेट कॉल
यानी आतंकी भी जानते हैं कि इंटरनेट कॉल आसानी से ट्रेस नहीं होती हैं। इसको देखते आतंकियों ने फर्जी आईडी पर सिम और नये मोबाइल का खूब इस्तेमाल किया है। जांच पड़ताल में आतंकियों से कई जुड़ीं बातें सुरक्षा एजेंसियों के सामने आई हैं, जिनकी पड़ताल करने में सुरक्षा एजेंसियां अभी लगी हैं।
पाक अधिकारियों के संपर्क में थे आतंकी
एटीएस के अधिकारियों की मानें तो देवबंद में पकड़े दोनों आतंकियों के मोबाइल फोन में पाकिस्तानी आतंकियों के मेसेज मिले हैं। इंटरनेट कॉलिंग होने के प्रमाण भी एटीएस को मिले है। दावा है कि पाकिस्तान में उच्च स्तर के अधिकारी से आतंकी शाहनवाज और आकिब संपर्क में थे। आतंकियों के इरादे नापाक थे। उनको क्या-क्या करना है, इसकी जानकारी पाकिस्तान में बैठे अधिकारी आतंकियों को देते थे।