लखीमपुर खीरी के निघासन में दुष्कर्म के दो बहनों की हत्या मामले में किशोरियों का परिवार अभी भी गुस्से में है। बकौल परिजन, उनके साथ धोखा हुआ। जख्मों पर लगाए जा रहे सरकारी मरहम से भी परिजन खासे खफा हैं। बेटियों को बदनाम करने की पुलिसिया कहानी से परिजन और ग्रामीणों में अब भी आक्रोश है। उनका एक ही सवाल है। मां के सामने से बेटियां खींचकर ले जाईं गईं तो पुलिस क्यों कह रही है कि वे अपनी मर्जी से गईं थीं। उनका कहना है कि मुआवजा देकर हमारे जख्मों पर मरहम नहीं लगाया जा सकता।
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लखीमपुर खीरी कांड के आरोपी का घर
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस रिपोर्ट में अगवा करने की धारा न दर्ज करना, किसी के गले नहीं उतर रहा है। पीड़ित के भाई का कहना है कि हमने अपनी बहनें खो दीं। पुलिस ऐसी कहानी बता रही है कि परिवार की बदनामी हो रही है। उसकी मां के सामने ये सब हुआ। आरोपियों ने उसे धक्का दिया। मां की चूड़ियां टूटकर उसके हाथों में गड़ गईं।
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लखीमपुर खीरी कांड में पकड़े गए आरोपी
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भाई का कहना है कि पुलिस ने इन सब बातों पर ध्यान नहीं दिया। आखिर वह किस आधार पर कह रही है कि लड़कियां अपनी मर्जी से आरोपी युवकों के साथ गई। सिर्फ उसके कह देने से हम कैसे मान लें। परिवार के सदस्यों को यह भी कहना है कि पुलिस मामले को निपटाने के लिए उन्हें समझाती रही कि उनकी सभी मांगें मानी जाएंगी।
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lakhimpur kheri case
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पिता बोले, हम असहाय महसूस कर रहे
पीड़ित पिता का कहना है कि हम असहाय महसूस कर रहे हैं। पुलिस जैसा चाहेगी, वैसा ही करेगी। मुआवजा देकर सोच रही है कि हमारे जख्मों पर मरहम लग जाएगा तो ऐसा नहीं होने वाला। हमारी बेटियां छिन गईं। हमें अपार दर्द है। जो तहरीर दी गई, उसके अनुसार ही मुकदमा दर्ज होना चाहिए। घटना एकदम साफ है।
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lakhimpur kheri case
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कहा, जब तक अपराधियों को कड़ी सजा नहीं मिलती। हम तड़पते रहेंगे। शुक्रवार को भी पीड़ित परिवार रोता-बिलखता रहा। मां अब सामान्य नहीं हो पाई। बार-बार बेहोश हो जा रही है। रिश्तेदार उसे जबरदस्ती खाने-पिलाने की कोशिश कर हैं। बार-बार यही कह रही है कि उसके सामने से उसकी बेटियों को उठा ले गए।