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मॉडल रॉकेट का सफल प्रशिक्षण: जल्द ही 600 युवा वैज्ञानिक आएंगे Kushinagar, डीएम बोले- युवाओं में बढ़ेगा रुझान
Mon, 16 Jun 2025 04:08 PM IST
रोहित सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, कुशीनगर
अमर उजाला ब्यूरो, कुशीनगर
Published by: रोहित सिंह
Updated Mon, 16 Jun 2025 04:08 PM IST
सार
डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस प्रतियोगिता के आयोजन से सुदूर क्षेत्र के बच्चों में राकेट व अंतरिक्ष के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। रॉकेट प्रतियोगिताएं छात्रों के लिए अविश्वसनीय रूप से लाभदायक और कारगर साबित होती है।
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इन- इसरो के निदेशक संग सीएम योगी व सांसद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
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इसरो, इन स्पेस और ट्रस्ट टेक इंडिया कंपनी के संयुक्त प्रयास से शनिवार की शाम रकबा जंगलीपट्टी के एपी बांध स्थित गंडक नदी के किनारे राकेट व सेटेलाइट की सफल लांचिंग की गई। इन-स्पेस के निदेशक के साथ बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री ने प्रतियोगिता के प्रभाव और इससे उत्तर प्रदेश और भारत के उभरते वैज्ञानिकों को होने वाली लाभ की चर्चा की।
इन इसरो निदेशक के साथ साथ डीएम महेंद्र सिंह तंवर व सांसद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अगुवाई में ऐसे कार्यक्रमों से विकसित भारत के संकल्पों में देवरिया और कुशीनगर की भागीदारी होगी। उन्होंने कहा कि यह ट्रायल लॉन्च देवरिया-कुशीनगर के युवाओं के लिए अंतरिक्ष की नई उड़ान साबित होगा।
इन-स्पेस के निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि पूर्वांचल की धरती पर ऐसी प्रतियोगिता से यहां के युवाओं में अंतरिक्ष के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जिससे वो वैज्ञानिक बनने की ओर अग्रसर होंगे। इसके अलावा विद्यायार्थी प्रौद्योगिकी और गणित के विभिन्न उपकरणों और सॉफ्टवेयर का उपयोग करना सीखते हैं और गणनाएं करते हैं। जैसे रॉकेट की ऊंचाई, गति और प्रक्षेपण पथ का अनुमान लगाना।
इन-स्पेस के निदेशक डॉ. विनोद कुमार ने कहा कि पूर्वांचल की धरती पर ऐसी प्रतियोगिता से यहां के युवाओं में अंतरिक्ष के प्रति जागरूकता बढ़ेगी, जिससे वो वैज्ञानिक बनने की ओर अग्रसर होंगे। इसके अलावा विद्यायार्थी प्रौद्योगिकी और गणित के विभिन्न उपकरणों और सॉफ्टवेयर का उपयोग करना सीखते हैं और गणनाएं करते हैं। जैसे रॉकेट की ऊंचाई, गति और प्रक्षेपण पथ का अनुमान लगाना।
रॉकेट तैयार करते छात्र
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रॉकेट बनाने में कई चुनौतियां आती हैं, जैसे रॉकेट को कैसे स्थिर रखा जाए, कैसे अधिकतम ऊंचाई हासिल की जाए या कैसे सुरक्षित रूप से वापस उतारा जाए। इन समस्याओं को हल करने के लिए छात्रों को रचनात्मक रूप से सोचने एवं अन्तरिक्ष के सम्बन्ध में जागरूक होगें।
डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस प्रतियोगिता के आयोजन से सुदूर क्षेत्र के बच्चों में राकेट व अंतरिक्ष के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। रॉकेट प्रतियोगिताएं छात्रों के लिए अविश्वसनीय रूप से लाभदायक और कारगर साबित होती हैं जो छात्रों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डीएम महेंद्र सिंह तंवर ने इस कार्यक्रम को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि इस प्रतियोगिता के आयोजन से सुदूर क्षेत्र के बच्चों में राकेट व अंतरिक्ष के प्रति जागरूकता बढ़ेगी। रॉकेट प्रतियोगिताएं छात्रों के लिए अविश्वसनीय रूप से लाभदायक और कारगर साबित होती हैं जो छात्रों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
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डीएम महेंद्र सिंह तंवर और सांसद के चेहरे की खुशी सफल लांचिंग के बारे में बता रही
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अब अक्तूबर-नवंबर में तमकुहीराज में मां नारायणी के तट पर इन-स्पेस, एस्ट्रोनॉटिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया और इसरो के सहयोग से मॉडल रॉकेट्री/कैंस्ट इंडिया स्टूडेंड कंप्टीशन का आयोजन होगा। प्रशिक्षण के पहले दिन के ट्रायल लॉन्च के बाद इन-स्पेस, एएसआई और जिला विज्ञान क्लब कुशीनगर के बीच आगामी प्रतियोगिता को लेकर कुशीनगर प्रशासन के साथ करार साइन हुआ।
यह मॉडल रॉकेट एक निजी कंपनी थ्रस्ट टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है। यह एक किलोमीटर तक की ऊंचाई तक जाकर एक कैन साइज उपग्रह का प्रक्षेपण करता है। इस प्रतियोगिता के लिए इसी तरह के रॉकेट और कैन साइज उपग्रह देशभर से भाग ले रहे स्टूडेंट की टीम बना रही है।
यह मॉडल रॉकेट एक निजी कंपनी थ्रस्ट टेक इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने बनाया है। यह एक किलोमीटर तक की ऊंचाई तक जाकर एक कैन साइज उपग्रह का प्रक्षेपण करता है। इस प्रतियोगिता के लिए इसी तरह के रॉकेट और कैन साइज उपग्रह देशभर से भाग ले रहे स्टूडेंट की टीम बना रही है।
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रॉकेट तैयार करने के बाद
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इन सभी टीम को इन-स्पेस, इसरो और इसरो के पूर्व वैज्ञानिक मार्गदर्शन दे रहे हैं। इस परीक्षण प्रक्षेपणों का उद्देश्य प्रक्षेपण स्थल की उपयुक्तता और अन्य आवश्यकताओं जैसे सुरक्षा मार्जिन, संचार रेंज, क्षेत्र पुनर्प्राप्ति की स्थिति आदि का परीक्षण करना था। इस वर्ष के अंत में (अक्टूबर-नवंबर) आयोजित होने वाली छात्र प्रतियोगिता के लिए तैयारी का हिस्सा है।
इस इस दौरान इन-स्पेस के निदेशक डॉ. विनोद कुमार, सीडीओ गुंजन द्विवेदी, एडीएम (वि0/रा0) वैभव, तमकुहीराज एसडीएम ऋषभ पुंडीर, डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।
इस इस दौरान इन-स्पेस के निदेशक डॉ. विनोद कुमार, सीडीओ गुंजन द्विवेदी, एडीएम (वि0/रा0) वैभव, तमकुहीराज एसडीएम ऋषभ पुंडीर, डीआईओएस श्रवण कुमार गुप्ता आदि मौजूद रहे।