यमुना और किलनहाई के दरिया से घिरे मल्हीपुर गांव के हालात टापू से हो गए है। चारों तरफ पानी ही पानी नजर आ रहा है। गांव के लोगों को जल प्रलय में फसल तो बर्बाद हो गई लेकिन अभी लोगों को यमुना मइया से लाभ की काफी उम्मीदें है। वजह तीन हजार की आबादी वाले इस गांव के लोगों का मुख्य व्यवसाय बालू और खेती है। चायल तहसील का मल्हीपुर गांव में ही किलनहाई नदीं का विलय होता है।
कौशम्बी में जल प्रलय सैकडों गांव बने टापू
टापू की बस्ती में भी पानी से हैं घिरे
मंझनपुर। मल्हीपुर गांव यमुना और किलनहाई से बुरी तरह घिर गया। दोनों नदियों का पानी बस्ती के अंदर प्रवेश कर चुका है। गांव जाने वाले मुख्य कच्चे मार्ग पर जिस तरह से पानी का स्तर बढ़ रहा है, उससे शाम तक वहां भी पानी भरने की उम्मीद है। प्रशासन के लाख प्रयास के बाद भी लोग गांव नहीं खाली कर रहे।
चार दिन से बाधित है आपूर्ति
मंझनपुर। मल्हीपुर गांव जाने वाली लाइन के पोल और ट्रांसफार्मर पानी में डूबे हैं। इसके कारण चार दिन से गांव में आपूर्ति नहीं दी जा रही है। बिजली नहीं होने से लोग आधुनिक संसाधनों से कट गए।
मंझनपुर। गांव के लोग छोटी नाव के सहारे जान जोखिम में डालकर केवट पुरवा जाते हैं। यहां से टेंपो पकड़ कर पुरखास बाजार आते हैं। यहीं से लोग अपनी जरूरतों का समान खरीदकर लाते हैं। जिन लोगों के पास बाइक आदि की व्यवस्था है वह चक पिनहा मार्ग से बड़ी नाव में बाइक लादकर पार उतरते हैं और फिर अपने गंतव्य को रवाना होते हैं।
मंझनपुर। मल्हीपुर गांव में सब्जी भले ही नष्ट है लेकिन लोगों का काम मछली से चल रहा है। जाल डालकर मछली पकड़ी जाती है, उसी को खाया जाता है। कबीलों सरीखी जिंदगी गुजार रहे लोग खुश हैं और सिर्फ पानी हटने का इंतजार कर रहे है।