कन्नौज के छिबरामऊ में सिरफिरे दीपू चक ने करीब आठ घंटे तक कांशीराम कॉलोनी में दहशत का माहौल बनाए रखा। इस दौरान बच्चों के साथ ही पुलिस प्रशासन के भी हलक में जान अटकी रही। 13 वर्षीय बच्ची अपनी सूझबूझ से दीपू को चकमा देकर खुद ही बाहर निकल आई थी। हालांकि, वह भाई को बचाने के लिए आसपास मौजूद भीड़ से हाथ जोड़कर मिन्नतें करती रही।
पुलिस अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद सिरफिरे के साथ अधिकारियों की लगातार बातचीत चलती रही। इस दौरान पुलिस लगातार उसे बंधक बनाए गए बच्चे को छोड़ने के लिए कहती रही।
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मुठभेड़ के बाद पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
दीपू महिला से मिलने की जिद पर अड़ा कभी तमंचे की नाल बच्चे के मुंह में डाल देता तो कभी खुद के सिर पर रखकर भेजा उड़ाने की धमकी देता। जिले के आलाधिकारी शाम तक इस पूरे घटनाक्रम के पल-पल की सूचना लेते रहे और शाम को उसके पकड़े जाने की खबर के साथ राहत भरी सांस ली।
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मौके पर जमा पुलिस
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भीड़ ने कई बार किया पथराव
छिबरामऊ की कांशीराम कॉलोनी के ब्लॉक नंबर 84 के सबसे निचले तल की कॉलोनी में किशोरी के रोते बिखलते हुए मदद की गुहार लगाते ही कॉलोनी के बाशिंदे जमा होने लगे। बच्चों को बंधन मुक्त कराने के लिए लोगों ने कई बार पथराव किया। इसके बाद भी दीपू ने जब गेट नहीं खोला तो लोगों ने हाथों में लाठी डंडे थाम लिए। बच्ची ने बाहर आकर जब लोगों को दीपू के पास तमंचा होने की जानकारी दी तो भीड़ ठिठक गई।
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खुद की कनपटी पर तमंचा लगाकर धमकी देता आरोपी दीपू
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
अंधेरा होते ही मंगवाया गया जेनरेटर
अंधेरा होने के बाद भी युवक ने कॉलोनी का दरवाजा नहीं खोला। तब अफसरों ने रोशनी के इंतजाम के लिए जनरेटर मंगवा लिया। साथ ही किसी आपात स्थिति में मौके पर ही चिकित्सीय व्यवस्था के लिए सौ शैय्या अस्पताल के डाॅ. महेश विश्वकर्मा, स्वास्थ्य कर्मियों को भी बुला लिया गया। देर शाम एसओजी टीम ने भी मौके पर पहुंच कर अफसरों के साथ मोर्चा संभाल लिया था।
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खिड़की से मदद के लिए गुहार लगाती किशोरी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
किशोरी ने इस तरह झांसा देकर बचाई अपनी जान
किशोरी और उसके को तमंचे की दम पर बंधक बनाने के बाद काफी देर तक दीपू कभी बच्चे की मुंह में तमंचे की नाल डालता तो कभी कनपटी पर लगाकर उनकी मां को बुलाने के लिए धमकाता। इस बीच किशोरी सूझबूझ दिखाते हुए फोन लाकर मां से बात कराने की बात कहकर कमरे से बाहर निकल गई। दूसरी तरफ भाई के मौत के मुंह में होने पर वह आसपास के लोगों से चीख-चीख कर उसे बचाने के लिए हाथ-पैर जोड़ती रही।