लग्जरी काराें के दाैर में वाे अाज भी घाेड़ी की सवारी पर जब निकलते हैं ताे सड़काें पर उनके चाहने वालाें की भीड़ लग जाती है। पूरा शहर इन्हें घाेड़ी वाले बाबा के नाम से जानता है। शहर के लाेगाें काे इनकी सवारी निकलने का इंतजार रहता है पर घाेड़ी पर सवारी करने की वजह अापका दिल खुश कर देगी।
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अपनी घाेड़ी रानी के साथ मान सिंह
दिबियापुर में रहने वाले 80 वर्ष उम्र के नीलकंठ का पुर्वा निवासी मान सिंह यादव सड़क पर अपनी ऊंची घोड़ी की पीठ पर बैठकर निकलते हैं। वाहनों की भीड़ में अकेले घोड़ी पर सवार मान सिंह की ओर बरबस ही लोगों की निगाहें पहुंच जाती हैं। मानसिंह बताते हैं कि 35 बरस हो गए हैं घोड़ी रखते रखते। इसी वजह से आसपास के कई गांवों के लोग उन्हें घोड़ी वाले बाबा कहकर पुकारने लगे हैं।
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घाेड़ी पर चलने से प्रदूषण नहीं फैलता
मानसिंह बताते हैं कि 35 बरस हो गए हैं घोड़ी रखते रखते। इसी वजह से आसपास के कई गांवों के लोग उन्हें घोड़ी वाले बाबा कहकर पुकारने लगे हैं। घोड़ी सबसे वफादार जीव है। कभी वह रास्ते में बीमार पड़ जाएं तो रानी उसे लेकर घर तक पहुंचाती है। जाम में भी नहीं फंसती। पुलिस का भी कोई झंझट नहीं है।
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घाेड़ी के बारे में लाेगाें काे बताते मान सिंह
भाई ने कहा कि यदि घोड़ी रखोगे तो वह साथ में नहीं रहेगा। जब उन्होंने कहा कि वह घोड़ी के बिना नहीं रहेंगे तो भाई अलग रहने लगा। घोड़ी की सेवा करने से उसकी पत्नी भी नाराज रहती है। वह अपनी छह बीघा खेती में अनाज पैदा करके अपनी रानी को खुश रखता है और खुद भी खुश रहता है। बताया कि उसकी घोड़ी की कीमत वर्तमान में एक लाख रुपये से अधिक है।