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PHOTOS: ‘मुल्क फिल्म देखेंगे तो अवसाद और बढ़ेगा'

Sat, 04 Aug 2018 05:36 PM IST
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर
गौरव शुक्ला, अमर उजाला, कानपुर Updated Sat, 04 Aug 2018 05:36 PM IST
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Terrorist Saifulla's Father Sartaj statement about Mulk Movie
आतंकी सैफुल्लाह की अब घर में भी चर्चा नहीं होती: सरताज
फिल्म ‘मुल्क’ की कहानी कानपुर के सरताज खान की जिंदगी से प्रेरित बताई जा रही है। फिल्म के मुख्य कलाकार ऋषि कपूर हैं जो आतंकवादी गतिविधियों में लिप्त लड़के के पिता का रोल कर रहे हैं। फिल्म 'मुल्क' में ऋषि कपूर हूबहू सरताज की तरह डायलॉग बोलते नजर आ रहे हैं। शुक्रवार को कानपुर शहर के तमाम सिनेमाघरों में ‘मुल्क’ फिल्म का प्रदर्शन हुआ। फिल्म देखकर आए दर्शकों का रवैया मुराद अली (ऋषि कपूर)- शाहिद (प्रतीक बब्बर) की रील लाइफ और सरताज-सैफुल्ला की रियल लाइफ की कहानी को लेकर अलग-अलग था। दर्शकों के अनुसार वे जो देखने के लिए सिनेमाहॉल में गए थे फिल्म के राइटर और डायरेक्टर ने उस बिंदु को कहीं न कहीं गुम कर दिया या सही ढंग से पेश नहीं कर पाये। फिल्म में सच दिखाने की जगह कहानी में समुदाय विशेष का महिमा मंडन किया गया है। अपनी प्रतिक्रियाएं देते हुए दर्शकों ने ऋषि कपूर और आशुतोष राणा की एक्टिंग की तारीफें भी कीं।  


आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- मुल्क फिल्म को लेकर क्या है आतंकी सैफुल्ला के पिता का रिएक्शन...
Terrorist Saifulla's Father Sartaj statement about Mulk Movie
सरताज
आतंकी सैफुल्ला की अब घर में भी चर्चा नहीं होती: सरताज
लखनऊ में आठ मार्च को आतंकवाद निरोधी दस्ते के साथ एनकाउंटर में मारा गया आतंकी सैफुल्ला की अब उसके घरवाले भी चर्चा नहीं करते हैं। घरवालों ने उसे अपने जेहन से निकाल दिया है। यह बात सैफुल्लाह के पिता सरताज ने बताई। शुक्रवार को सैफुल्लाह पर आधारित फिल्म मुल्क रिलीज होने के मामले उन्होंने कहा कि वह फिल्म नहीं देखते हैं। उसे (सैफुल्लाह) हम भुला रहे हैं।
'मुल्क' फिल्म के संबंध में सरताज ने कहा कि पता नहीं उसकी क्या स्टोरी है। अब इससे कोई फायदा नहीं है। उनके बच्चे भी फिल्म देखने नहीं जाते। घर में सिर्फ एक टीवी है जिस पर खबरें भर देखते हैं। उन्होंने कहा कि सैफुल्ला की घटना ने पूरे घर को बहुत आहत किया है। उन्होंने उस वक्त अपनी बात दुनिया के सामने कह दी थी। अब वह किसी से भी इस संबंध में चर्चा नहीं करना चाहते। बात करेंगे या फिल्म देखेंगे भी तो अवसाद और बढ़ेगा। जो बात खत्म हो गई, उसे बार-बार दुहराना नहीं चाहते।  

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- लोगों की प्रतिक्रियाएं....
Terrorist Saifulla's Father Sartaj statement about Mulk Movie
दर्शकों की प्रतिक्रियाएं
‘मैने अमर उजाला में पढ़ा था कि ‘मुल्क’ फिल्म कानपुर के सैफुल्ला और सरताज पर बनी है लेकिन डायरेक्टर इस फिल्म को बनाने का मतलब और संदेश सही ढंग नहीं समझा पाए। फिल्म में केवल एक समुदाय का पक्ष रखा गया जबकि उन लोगों की प्रतिक्रियाएं भी लेना जरूरी था जिनके मन में यह सवाल उठ रहे थे कि मोहल्ले का लड़का आखिर आतंकवादी क्यों बना। फिल्म में कोर्ट के सीन फैक्ट को क्लियर नहीं कर पाए हैं। फिल्म को कानपुर की कहानी दिखाने की बजाए बनारस को केंद्रित किया गया है।’ - एडवोकेट हेमंत उपाध्याय

‘फिल्म में मुझे इतना समझ में आया कि कहानी बस एक समुदाय पर थोपी जा रही है। एक समुदाय के बारे में केवल यह दिखाया गया है कि दूसरे अलग-अलग समुदाय के लोग उसके बारे में गलत समझते हैं। ‘मुल्क’ में सैफुल्ला का रोल कर रहे प्रतीक बब्बर एक आतंकवादी की मनोदशा को जीवंत नहीं कर पाये हैं। हम यह सोचकर फिल्म देखने आए थे कि आखिर कोई युवक आतंकवादी कैसे बनता है लेकिन फिल्म में ऐसा कुछ दिखाया ही नहीं गया। कई जगहों पर ऐसा जरूर लगा कि ऋषि कपूर हूबहू सरताज की तरह से बात कर रह हैं।’ - आशुतोष सक्सेना

आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- पिता के दिमाग में उस समय क्या चल रहा था ...
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Terrorist Saifulla's Father Sartaj statement about Mulk Movie
दर्शकों की प्रतिक्रियाएं
‘फिल्म की कहानी असल में केवल एक समुदाय के परिवार के खोये सम्मान पर ही आधारित कर दी गई। इसका बाकी समाज से कोई लेना देना था ही नहीं। मैं यह देखना चाहता था कि एक पिता के दिल और दिमाग में उस समय क्या चल रहा था जब उसे यह पता चला कि उसका बेटा आतंकवादी बन गया और एनकाउंटर में मार दिया गया। अपने आतंकी बेटे का अंतिम संस्कार न करके वह अपने समाज, अपने समुदाय और अपने देश को आखिर क्या संदेश देना चाहता था यह प्वाइंट कहानी में कहीं खो गया था।’- चंद्र प्रकाश पांडेय

‘मुल्क से बढ़कर कुछ नहीं है। हिंदू-मुस्लिम की खाई को पाटने की अच्छी कोशिश की गई है। ‘मेरे मुल्क के लिए मेरा प्यार साबित करो’ और ‘मेरे घर में मेरा स्वागत करने का हक उन्हें किसने दिया’ इन डायलॉग्स ने यह साबित कर दिया कि ऋषि कपूर एक बेहतरीन कलाकार हैं। लेकिन मुल्क फिल्म वास्तविकता से बिल्कुल अलग है। यह हम भी जानते हैं कि हर मुस्लिम आतंकवादी नहीं होता लेकिन मुस्लिम ही आतंकवादी क्यों बनते हैं इसके बारे में नहीं दिखाया गया।’ - सोनू तिवारी 
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