सफर सिम से सॉफ्टवेयर तकः सफलता और संघर्ष का ये किस्सा आपकी तकदीर बदल सकता है
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इंटर की पढ़ाई के दौरान फीस जमा न होने पर स्कूल से नाम कटने का अल्टीमेटम मिल गया। परेशान विकास स्कूल की फीस कैसे जमा हो, इसके लिए उपाय खोजने लगा। फिर उसने ब्रेड बेचने और सिम बेंचने का काम उरई की सड़कों पर शुरु कर दिया और किसी तरह स्कूल की पढ़ाई जारी रखी। वर्ष 2008 में इंटर की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने बीटेक की पढ़ाई की।
आर्थिक स्थिति खराब होने के चलते यहां भी उसने रात में गार्ड की नौकरी की और दिन में पढ़ाई कर बीटेक किया। बीटेक की डिग्री हासिल करने के बाद भी उसकी परेशानियां कम नहीं हुई। उसने दिल्ली जाकर नौकरी करने का विचार किया ताकि मां बाप व छोटे भाई आकाश, बहनें वंशिका और दीपशिखा को आर्थिक विपन्नता से छुटकारा दिला सके।