उन्नाव सामूहिक दुष्कर्म पीड़िता को पेट्रोल डाल जिंदा जलाए जाने फिर उसकी मौत के बाद पूरा देश गुस्से गम और आक्रोश से उबल रहा है। पीड़िता की मौत से पूरे देश में हर ओर शोक की लहर है। हर कोई उसे इंसाफ दिलाने के लिए सड़कों पर उतरा आया है। मौत के समय भी उसकी जुबान पर सिर्फ न्याय की भीख और दरिंदों के लिए सजा के शब्द थे। हम आपको उस बेबस युवती की पूरी कहानी बताने जा रहे हैं जिसे धोखा मिला। सामूहिक दुष्कर्म हुआ। वो न्याय के लिए हर देहरी पर दौड़ी। जिंदगी के लिए जंग भी लड़ी लेकिन मिली एक दर्दनाक मौत।
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उन्नाव कांड में दुष्कर्म पीड़िता की मौत के बाद फूटा लोगों का गुस्सा
- फोटो : अमर उजाला
शादी के नाम पर धोखा देकर शारीरिक शोषण, फिर सामूहिक दुष्कर्म के बाद इंसाफ के लिए लड़ रही पीड़िता पर पेट्रोल डालकर आग लगा दी गई थी। जलाए जाने के बाद वह 44 घंटे तक जिंदगी और मौत के बीच झूलती रही। शुक्रवार रात 11:40 बजे सांसों ने उसका साथ छोड़ दिया। उसकी ख्वाहिश थी कि जुल्मों की इंतहा करने वालों को वह अपनी आंखों के सामने सजा पाते देखे। इसका जिक्र उसने इलाज के दौरान अपने भाई से किया था।
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पूरा देश उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता की मौत के बाद उबल रहा है
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अपनी अंतिम इच्छा पूरी होने से पहले ही वह दुनिया से अलविदा कह गई। सितम की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। 23 वर्षीय युवती को गांव के शिवम त्रिवेदी नाम ने प्रेमजाल में फंसाया। शादी का झांसा देकर रायबरेली ले गया। वहां किराये का कमरा लेकर साथ रखा और कई बार दुष्कर्म किया। आरोपी अश्लील वीडियो बनाकर वायरल करने की धमकी देकर काफी दिनों तक शारीरिक शोषण करता रहा।
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बेटी की मौत के बाद से पिता और भाई बदहवास हैं
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19 जनवरी 2018 को आरोपी ने रायबरेली सिविल कोर्ट में वैवाहिक अनुबंध पत्र भी बनवाया। फिर एक महीने बाद उसे गांव छोड़ गया। शादी कादबाव बनाने पर जान की धमकी देने लगा। धमकियों से दहशत में आई पीड़िता को उसके परिवार ने रायबरेली के लालगंज थाना क्षेत्र में उसकी बुआ के यहां भेज दिया। 12 दिसंबर 2018 को शिवम अपने परिवार के ही शुभम त्रिवेदी के साथ रायबरेली पहुंचा।
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उन्नाव दुष्कर्म पीड़िता को अस्पताल ले जाती पुलिस (फाइल फोटाे)
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रीति-रिवाज से शादी करने और साथ रखने का भरोसा दिलाकर बाइक में बैठाकर गांव ले आया। यहां दोनों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया। इसके बाद पीड़िता सामूहिक दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए बिहार थाने और रायबरेली के लालगंज थाने के चक्कर काटती रही। आरोपियों के परिवार और राजनीतिक लोगों के दबाव के कारण रिपोर्ट दर्ज नहीं हुई। पीड़िता ने वकील के माध्यम से न्यायालय और महिला आयोग से गुहार लगाई।