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बलिदान दिवसः रानी लक्ष्मीबाई से जुड़े वो किस्से जो हर नर-नारी के लहू में भर देंगे 'कर्तव्य का जोश'

Mon, 18 Jun 2018 10:38 PM IST
तान्या द्विवेदी / तनु चतुर्वेदी, कानपुर
तान्या द्विवेदी / तनु चतुर्वेदी, कानपुर Updated Mon, 18 Jun 2018 10:38 PM IST
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story of great freedom fighter rani laxmi bai
बलिदान दिवस
अंग्रेजों से लोहा लेने वाली झांसी की रानी की कहानी हम सभी जानतें हैं। आज उसी रानी का बलिदान दिवस है। इतिहास के पन्नों पर तो कई बार उनकी कहानी हम सभी ने पढ़ी है, लेकिन वास्तविकता में भी उनके करतबों को समेटने वाली स्थली को भी देखना चाहिए।

 

 

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रानी लक्ष्मीबाई
कानपुर जोकि कई सारी धरोहरों का प्रतीक है। यहीं पर रानी ने नाना साहब से रणनीति के दावपेज सीखे। नाना राव पार्क इस बात का प्रतीक माना जाता है। इसका विवरण इतिहास में भी दिया है। सुभद्रा कुमारी चौहान ने अपनी कविता में भी मेरठ,लखनऊ के साथ कानपुर का जिक्र किया है। 

 

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रानी लक्ष्मीबाई
कानपुर से रानी को विशेष लगाव था। छबीली ने अपना बचपन यहीं पर नाना राव के साथ बिताया था। उनके बचपन का नाम मनु था। उनके बचपन में नाना साहिब उनके दोस्त हुअा करते थे। जब लक्ष्मी बाई ने अाजादी की पहली जंग लड़ी थी तब  नाना राव ने उस जंग में उनके साथ अहम भूमिका निभाई थी। रानी लक्ष्मीबाई मराठा शासित झांसी की रानी अौर भारत की स्वतंत्रता संग्राम की प्रथम वनिता थीं। अंग्रजों से शासन से परेशान भारतवासियों में क्रोध की ज्वाला थी।

 

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रानी लक्ष्मीबाई
उसी का परिणाम था सन 1857 की क्रांति। यह प्रयास इतिहास में भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था। अंग्रजों के विरुद्ध रणयज्ञ में अपने प्राणों की अाहुति देने वाले योद्धाअोंं  में वीरांगना महारानी लक्ष्मीबाई का नाम सर्वोपरि है। अंग्रेजों से सामना करने के लिए उन्होंने नए सिरे से सेना का गठन किया। तात्या टोपे अौर लक्ष्मीबाई की संयुक्त सेना ने ग्वालियर के विद्रोही सैनिकों की मदद से ग्वालियर के एक किले पर कब्जा कर  लिया। रानी लक्ष्मीबाई ने जी जान से अंग्रेजी सेना का मुकाबला किया पर 18 जून 1858 को ग्वालियर के पास कोटा की सराय में ब्रिटिश सेना से लड़ते-लड़ते वीरगति को प्राप्त हो गई।



कविता की कुछ लाइन....
बुंदेले हर बोलों के मुंह हमने सुनी कहानी थी, खूब लड़ी मरदानी वो तो झांसी वाली रानी थी
झांसी चेती, दिल्ली चेती, लखनऊ लपटें छाईं थी 
मेरठ, कानपुर, पटना ने भी काफ़ी धूम मचाई थी। 

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