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Shobhan Sarkar Death: 1000 टन खजाने के दावे से संत ने 7 साल पहले सबको चौकाया था
Wed, 13 May 2020 05:37 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Wed, 13 May 2020 05:37 PM IST
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संत शोभन सरकार ने इसी किले में खजाना होने की कही थी बात
- फोटो : अमर उजाला
शोभन मंदिर के महंत विरक्तानंद सरस्वती बुधवार सुबह ब्रह्मलीन हो गए। उन्होंने आज सुबह करीब पांच बजे अपने आश्रम में अंतिम सांस ली। उनके देहांत की खबर लगते ही उनके लाखों भक्तों में शोक की लहर दौड़ गई। बता दें सात साल पहले उन्नाव जिले के बीघापुर तहसील के डौंडियाखेड़ा गांव स्थित राजा राव रामबक्श के खंडह किले में 1000 टन सोना का खजाना होने की बात कहकर संत शोभन सरकार ने सभी को चौका दिया था।
संत शोभन सरकार ने इसी किले में खजाना होने की कही थी बात
- फोटो : अमर उजाला
एएसआई की (आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) की जांच रिपोर्ट में 20 फीट गहराई में अचुंबकीय धातु (नान मैग्नेटिंग मेटल) होने की पुष्टि होने की रिपोर्ट के बाद 19 अक्तूबर 2013 को खजाने की तलाश में एएसआई ने खुदाई शुरू की थी। चंद घंटों में उन्नाव देश और दुनिया की नजरों में छा गया था। लेकिन खजाने की तलाश में लगातार 24 दिनों तक चली खोदाई के बाद भी खजाना नहीं निकला।मालूम हो कि संत शोभन सरकार व उनके शिष्य बाबा ओम ने डौंडियाखेड़ा गांव में स्थित राजा राव रामबक्श सिंह के खंडहर किले के भूगर्भ में 1000 टन सोना होने की भविष्यवाणी की थी। संत शोभन सरकार ने तत्कालीन केंद्र सरकार के एक मंत्री की मदद ली और एएसआई (आर्किलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) की टीम से जांच कराई गई। एएसआई ने रिपोर्ट में नान मैग्नेटिंग मेटल (अचुंबकीय धातु) होने की पुष्टि की।
संत शोभन सरकार ने इसी किले में खजाना होने की कही थी बात
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद केंद्र सरकार ने खुदाई की अनुमति दे दी। 18 अक्टूबर 2013 को संत द्वारा पूजा अनुष्ठान के बाद अगले दिन 19 अक्टूबर से खंडहर किले में तीन ब्लाक बनाकर खुदाई शुरू कराई। देश विदेश की मीडिया और उस स्थान को देखने के लिए दूर-दूर से लोगों के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। रोज हजारों का मजमा लगता और संत शोभन सरकार के अनुयायी उनके दर्शन करने आते थे। हालांकि संत सोभन सरकार के शिष्य ओम बाबा ने बाद में खोदाई का काम बंद करने के सरकार के फैसले पर ऐतराज जताया था। उनका दावा था कि अगर संत शोभन सरकार ने कोई बात कही है तो वह सौ फीसदी सच साबित होगी।
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संत शोभन सरकार ने इसी किले में खजाना होने की कही थी बात
- फोटो : अमर उजाला
एसएआई ने 6.1 मीटर की थी खोदाई
खजाने की तलाश में एएसआई ने लगातार 24 दिन खोदाई कराई। 24 दिनों में 6.10 मीटर खुदाई की गई थी। एएसआई ने खंडहर किले के ऊपर ही अपना अस्थाई कार्यालय भी बनाया था। कड़ी पुलिस सुरक्षा और वीडियोग्राफी की निगरानी में विशेष श्रमिकों ने पूरी अहतियात के साथ खोदाई की। इस दौरान कभी टूटी चूड़ी, मिट्टी के टूटे बर्तन और कई मीटर चौड़ी लखौरी ईंटों (छोटी ईंट) की एक दीवार के अलावा कुछ नहीं मिला। इसके बाद एएसआई ने खजाने की तलाश बंद कर दी थी।
खजाने की तलाश में एएसआई ने लगातार 24 दिन खोदाई कराई। 24 दिनों में 6.10 मीटर खुदाई की गई थी। एएसआई ने खंडहर किले के ऊपर ही अपना अस्थाई कार्यालय भी बनाया था। कड़ी पुलिस सुरक्षा और वीडियोग्राफी की निगरानी में विशेष श्रमिकों ने पूरी अहतियात के साथ खोदाई की। इस दौरान कभी टूटी चूड़ी, मिट्टी के टूटे बर्तन और कई मीटर चौड़ी लखौरी ईंटों (छोटी ईंट) की एक दीवार के अलावा कुछ नहीं मिला। इसके बाद एएसआई ने खजाने की तलाश बंद कर दी थी।
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संत शोभन सरकार ने इसी किले में खजाना होने की कही थी बात
- फोटो : अमर उजाला
स्वर्ण भंडार की तलाश बंद करने पर संत ने जताया था ऐतराज
लगातार तलाश के बाद भी खजाना न मिलने पर एएसआई ने तलाश का काम बंद कर दिया था। इसके बाद संत शोभन सरकार के शिष्य/प्रवक्ता बाबा ओम ने सरकार और न्यायालय से भी अपने अनुसार किले की खोदाई कराने की अनुमति मांगी थी, लेकिन अनुमति नहीं मिली।
सुर्खियों के बाद मिला पर्यटन स्थल
खजाने की तलाश में चलीं कुदालें कुछ भी नहीं तलाश पाईं, लेकिन डौंडियाखेड़ा का राजा राव रामबक्श सिंह के किले के इतिहास ने इसे पर्यटन स्थल का दर्जा दिला दिया। पुरातात्विक महत्व का होने के कारण किला पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने पर 2.76 करोड़ रुपये खर्च किए गए।
लगातार तलाश के बाद भी खजाना न मिलने पर एएसआई ने तलाश का काम बंद कर दिया था। इसके बाद संत शोभन सरकार के शिष्य/प्रवक्ता बाबा ओम ने सरकार और न्यायालय से भी अपने अनुसार किले की खोदाई कराने की अनुमति मांगी थी, लेकिन अनुमति नहीं मिली।
सुर्खियों के बाद मिला पर्यटन स्थल
खजाने की तलाश में चलीं कुदालें कुछ भी नहीं तलाश पाईं, लेकिन डौंडियाखेड़ा का राजा राव रामबक्श सिंह के किले के इतिहास ने इसे पर्यटन स्थल का दर्जा दिला दिया। पुरातात्विक महत्व का होने के कारण किला पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने पर 2.76 करोड़ रुपये खर्च किए गए।