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शबे बरातः जानिए,'कब्र पर लगे हरे पेड़-पौधों को क्यों नहीं हटाना चाहिए, क्या है हलवे की कहानी?'
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 28 Apr 2018 07:13 PM IST
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डेमाे पिक
यूपी/बांदाः इस्लामी कैलेंडर के शाबान माह की 15वीं तारीख को शबे बरात मनाई जाएगी। दरगाहों, मजारों और कब्रिस्तानों में सफाई के बाद रंगरोगन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। घरों में विभिन्न जायकों के हलुवा तैयार करने की भी तैयारियां चल रही हैं। इस रात को अधिकांश मुस्लिम इबादत में गुजारेंगे। कब्रिस्तानों और मजारों पर जाकर फातेहा पढ़ेंगे और अपने पूर्वजों के लिए दुआएं करेंगे। सफाई के नाम पर कब्रों से हरी घास या पेड़-पौधे उखाड़ना मना किया गया है।
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शबे बरात एक मई को सूरज ढलते ही शुरू होगी। यह अगले दिन सुबह सूर्योदय तक ही रहेगी। मुस्लिम विद्वान बताते हैं इस रात आसमान में ईश्वर अगले वर्ष के सारे फैसले कर देता है। रात को इबादत कर रहे लोगों के गुनाह माफ होते हैं। मुस्लिम घरानों में इसकी तैयारियां शुरू हो गईं हैं।
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आल इंडिया काजी बोर्ड के नायब सदर मौलाना हाजी सैय्यद मुमताज रब्बानी ने बताया कि शबे बरात पर मजारों पर जाना नबी की सुन्नत है। औरतों को मजार पर हरगिज नहीं जाना चाहिए। उनका जाना सख्त गुनाह है। उन्हें चाहिए कि वे घर में रहकर इबादत करें। उन्हें पूरा सवाब मिलेगा। मौलाना ने कहा कि कुछ लोग सफाई के नाम पर कब्रों के ऊपर लगे हरे पेड़-पौधे या घासफूस उखाड़ फेंकते हैं। यह गलत है। घास और हरे पेड़ नहीं हटाना चाहिए।
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मौलाना मुमताज रब्बानी
- फोटो : अमर उजाला
मौलाना रब्बानी ने कहा कि कब्रों और मजारों को आग से बचाएं। यानी अगरबत्ती या मोमबत्ती वगैरह कब्र से दूर जलाएं। कब्र पर नहीं। अलबत्ता मजार या कब्र पर खुशबू के लिए इत्र लगाया जा सकता है। यह भी बताया कि शबे बरात के दिन रोजा रखना चाहिए। पूरे साल के रोजे का सवाब मिलता है। हलुवे की बाबत बताया कि पैगंबरे इस्लाम का एक दांत शहीद हो गया था। उनके अनुयायी उवैश करनी ने श्रद्धा के चलते अपने सभी दांत तोड़ लिए थे। तब उन्हें पतला हलुवा खाने को दिया गया था। इसीलिए आज भी शबे बरात पर हजरत उवैश करनी की फातेहा दिलाई जाती है।