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चुनाव 2019: लोगों को पापा की खूबियां बता रहीं बेटियां, बहू ने उठाया ससुर की जीत का बीड़ा
Sat, 27 Apr 2019 11:17 AM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 27 Apr 2019 11:17 AM IST
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पापा के चुनाव प्रचार में उतरीं बेटियां
- फोटो : अमर उजाला
कानपुर महानगर लोकसभा क्षेत्र से भाजपा के प्रत्याशी सत्यदेव पचौरी, संगठन के साथ अपने प्रचार में तो लगे ही हैं, उनकी बेटियां और बहू भी कड़ी धूप में पापा को लोकसभा सदस्य बनाने में रात दिन एक कर रही हैं। पचौरी की बड़ी बेटी नीतू सिंह, छोटी बेटी ऋतु पाठक और बहू रेखा पचौरी घर की जिम्मेदारी के साथ-साथ चुनाव मैदान में भी अपनी भूमिका अदा कर रही हैं।
पापा के चुनाव प्रचार में उतरीं बेटियां
- फोटो : अमर उजाला
जिस तरह से पचौरी अपना प्रचार का कार्यक्रम तय करते हैं, उसी तरह से उनकी बेटियां भी रोजाना के हिसाब से किस क्षेत्र में कितने समय तक जनसंपर्क करना है, कार्यक्रम तैयार किया जाता है। यह सिलसिला पिछले 20 दिनों से अनवरत चल रहा है।
चुनाव प्रचार रैली
- फोटो : अमर उजाला
सुबह बहुत ही शांत मन से योजना बनाकर जनसंपर्क करने निकलती हूं। कई संगठनों से जुड़े होने की वजह से उनके भी काम होते हैं, अपना खुद का कारोबार है, उसे भी देखना होता है। लेकिन सच मानिए यह सब इतने अच्छे से मैनेज हो जाता है कि पता नहीं चलता। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि जब लोगों के बीच जाती हूं तो उनका पाजिटिव एप्रोच इतना ज्यादा होता है कि इससे ऊर्जा मिलती है। विधानसभा क्षेत्र के हिसाब से कार्यक्रम तय करती हूं। पहले भी पापा के लिए प्रचार किया है। इस बार क्षेत्रफल ज्यादा होने की वजह से ज्यादा जगहों पर जाने का मौका मिल रहा है। युवाओें में हिंदुत्व को लेकर काफी उत्साह देखने को मिल रहा है।
- नीतू सिंह, (पति - स्व. यति सिंह) सत्यदेव पचौरी की बड़ी बेटी
- नीतू सिंह, (पति - स्व. यति सिंह) सत्यदेव पचौरी की बड़ी बेटी
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पापा के चुनाव प्रचार में उतरीं बेटियां और बहूं
- फोटो : अमर उजाला
मेेरा आर्चीज एजूकेशन नाम से पनकी में एक स्कूल भी है। घर की जिम्मेदारी के साथ पापा को भी जिताने के लिए जनसंपर्क भी करना होता है। यह सभी काम करने के लिए एडवांस प्लान बनाते हैं। इसमें परिवार के सभी सदस्य जब देर शाम घर आते हैं तो बैठकर अगला प्लान तैयार कर लेते हैं। इस बीच कई बार स्कूल से भी फोन आ जाता है, तो वहां भी जाकर देखना होता है। जनसंपर्क के दौरान महिलाओं से मिलकर जो इनपुट मिलता है, उससे काफी खुशी होती। कई बार कुछ ऐसी बातें भी सामने आती है, जिसमें सुधार की गुंजाइश होती है तो उसे तत्काल करने की कोशिश की जाती है। साथ महिलाओं की टोली भी रहती है, तो इससे काम और आसान हो जाता है।
- ऋतु पाठक, (पति- बॉबी पाठक), सत्यदेव पचौरी की छोटी बेटी
- ऋतु पाठक, (पति- बॉबी पाठक), सत्यदेव पचौरी की छोटी बेटी
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मंत्री सत्यदेव पचौरी (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
मैं पंडित दीनदयाल एजूकेशन सेंटर की प्रिंसिपल भी हूं। ऐसे में पापा के लिए प्रचार के बीच कुछ समय के लिए स्कूल जाकर वहां की व्यवस्था जरूर देखती हूं। बाकी मोबाइल पर दिन भर रहती हूं, इससे किसी तरह की असुविधा नहीं होने पाती है। हम महिलाएं मल्टी टास्किंग के लिए जानी जाती हैं। पापा को इस उम्र में इतना ऊर्जावान देखकर तो लगता है कि हम लोग कुछ भी नहीं कर रहे हैं। जनसंपर्क के दौरान सीसामऊ क्षेत्र के मुस्लिम इलाकों में जाकर जब महिलाओं से बात की तो पहले उन्होंने कुछ संकोच किया, लेकिन कुछ देर के बाद खुलकर बोलने लगीं। इसमें कई तीन तलाक पीड़ित भी थीं। सभी की तरफ से काफी सहयोग मिल रहा है।
- रेखा पचौरी, (पति- अनूप पचौरी), सत्यदेव पचौरी की बहू
- रेखा पचौरी, (पति- अनूप पचौरी), सत्यदेव पचौरी की बहू