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नहीं रहे दर्शन सिंह यादव, खुलकर निभाई मुलायम से 'दोस्ती और दुश्मनी', पढ़िए कुछ यादगार किस्से
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 31 Aug 2018 09:00 AM IST
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दर्शन सिंह और मुलायम सिंह की फाइल फोटो
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इटावा जिले के सपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व राज्यसभा सदस्य बाबू दर्शन सिंह यादव का बुधवार देर रात ढाई बजे हृदय गति रुक जाने से निधन हो गया। आमजन में बाबूजी संबोधन से लोकप्रिय दर्शन सिंह का अंतिम संस्कार गुरुवार को सैफई ब्लाक के बहादुरपुर पोस्ट के हैवरा गांव में किया गया। इस दौरान उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर भी दिया गया। उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रो. रामगोपाल, जसवंतनगर विधायक शिवपाल सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। बीपी और शुगर से पीड़ित बाबू जी दो दिन पहले ही मथुरा से इलाज कराकर लौटे थे। उनके निधन की खबर से इटावा-मैनपुरी समेत कई जनपदों में शोक की लहर दौड़ गई। बाबूजी की अंतिम यात्रा में इटावा-मैनपुरी के अलावा आसपास के जिलों से कई लोग शामिल हुए। हैवरा गांव में बड़े बेटे आईएएस अफसर नागेंद्र प्रताप सिंह ने मुखाग्नि दी। नागेंद्र प्रताप सिंह मथुरा विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष हैं। उनके तीन बेटे और बहू समेत भरा पूरा परिवार है।
शिवपाल सिंह ने रामगोपाल से लिया आशीर्वाद
- फोटो : अमर उजाला
शिवपाल ने रामगोपाल के पैर छुए मगर खामोश रहे
पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं सपा के वरिष्ठ नेता बाबू दर्शन सिंह की अंत्येष्टि में पहुंचे शिवपाल सिंह यादव की सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव से मुलाकात हुई। इस मुलाकात में शिवपाल ने रामगोपाल के पैर छुए लेकिन, उसके बाद रामगोपाल दूसरी ओर जाकर खड़े हो गए। दोनों ही नेताओं के बीच कोई बात नहीं हुई। शिवपाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बाबूजी के बारे में जितना कहा जाए उतना कम है। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सुधार में अर्पण कर दिया था। वे समाजसेवी के साथ बड़े व्यवसायी भी थे। बाबूजी ने चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज की नींव रखी थी। वे कालेज के संस्थापक भी रहे। वहीं, रामगोपाल ने बाबूजी के समाज को दिशा देने वाले प्रयासों की सराहना की।
पूर्व राज्यसभा सदस्य एवं सपा के वरिष्ठ नेता बाबू दर्शन सिंह की अंत्येष्टि में पहुंचे शिवपाल सिंह यादव की सपा के राष्ट्रीय महासचिव प्रोफेसर रामगोपाल यादव से मुलाकात हुई। इस मुलाकात में शिवपाल ने रामगोपाल के पैर छुए लेकिन, उसके बाद रामगोपाल दूसरी ओर जाकर खड़े हो गए। दोनों ही नेताओं के बीच कोई बात नहीं हुई। शिवपाल ने मीडिया से बातचीत में कहा कि बाबूजी के बारे में जितना कहा जाए उतना कम है। उन्होंने अपना पूरा जीवन समाज सुधार में अर्पण कर दिया था। वे समाजसेवी के साथ बड़े व्यवसायी भी थे। बाबूजी ने चौधरी चरण सिंह पीजी कॉलेज की नींव रखी थी। वे कालेज के संस्थापक भी रहे। वहीं, रामगोपाल ने बाबूजी के समाज को दिशा देने वाले प्रयासों की सराहना की।
बाबू दर्शन सिंह की शवयात्रा
- फोटो : अमर उजाला
मुलायम सिंह के संघर्ष के साथी थे बाबू दर्शन सिंह
पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर वरिष्ठ नेता और समाजसेवी बाबू दर्शन सिंह सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव से उम्र में एक साल छोटे थे। उनका जन्म 31 जुलाई 1944 को सैफई ब्लॉक के बहादुरपुर पोस्ट हैवरा में संपन्न परिवार में हुआ था। बाबू दर्शन सिंह की छवि इटावा के एक व्यवसायी के रूप में थी। उनके इटावा-मैनपुरी में कई ईंट के भट्ठे और राइस मिलें हैं। मुलायम सिंह के संघर्ष के दिनों में बतौर मित्र बाबू दर्शन सिंह हमेशा साथ रहे।
पांच भाइयों में दूसरे नंबर पर वरिष्ठ नेता और समाजसेवी बाबू दर्शन सिंह सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव से उम्र में एक साल छोटे थे। उनका जन्म 31 जुलाई 1944 को सैफई ब्लॉक के बहादुरपुर पोस्ट हैवरा में संपन्न परिवार में हुआ था। बाबू दर्शन सिंह की छवि इटावा के एक व्यवसायी के रूप में थी। उनके इटावा-मैनपुरी में कई ईंट के भट्ठे और राइस मिलें हैं। मुलायम सिंह के संघर्ष के दिनों में बतौर मित्र बाबू दर्शन सिंह हमेशा साथ रहे।
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सपा के राष्ट्रीय महासचिव रामगोपाल के साथ खड़े पूर्व मंत्री रामसेवक गंगापुरा, कृष्णमुरारी गुप्ता
- फोटो : अमर उजाला
मृत्यु उपरांत भोज के खिलाफ बड़ा आंदोलन चलाया
बाबू दर्शन सिंह को नेता के साथ-साथ समाजसेवी के रूप में जाना जाता है। बाबू दर्शन सिंह ने केंद्रीय समाज सेवा समिति का गठन किया। उसके माध्यम से उन्होंने इटावा-मैनपुरी, कन्नौज समेत कई जनपदों में दहेज , मृत्यु उपरांत भोज और नशा का खुलकर विरोध किया। उन्होंने तेरहवीं के जगह पर शांति पाठ कराने का प्रयास किया। काफी संघर्ष के बाद उनकी पहल रंग लाई और इटावा समेत कई जनपदों में लोगों ने मृत्यु उपरांत भोज के स्थान पर शांति पाठ कराना शुरू किया। वे खुद भी शांति पाठ कराने जाते थे।
बाबू दर्शन सिंह को नेता के साथ-साथ समाजसेवी के रूप में जाना जाता है। बाबू दर्शन सिंह ने केंद्रीय समाज सेवा समिति का गठन किया। उसके माध्यम से उन्होंने इटावा-मैनपुरी, कन्नौज समेत कई जनपदों में दहेज , मृत्यु उपरांत भोज और नशा का खुलकर विरोध किया। उन्होंने तेरहवीं के जगह पर शांति पाठ कराने का प्रयास किया। काफी संघर्ष के बाद उनकी पहल रंग लाई और इटावा समेत कई जनपदों में लोगों ने मृत्यु उपरांत भोज के स्थान पर शांति पाठ कराना शुरू किया। वे खुद भी शांति पाठ कराने जाते थे।
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अंत्येष्टि के वक्त दर्शन सिंह के भाई से मुलाकात करते शिवपाल सिंह
- फोटो : अमर उजाला
जिला परिषद के चुनाव में मुलायम से हुआ था मतभेद
बाबूजी का जिला परिषद के चुनाव में मुलायम सिंह से मतभेद हो गया था। वे जिला परिषद के अध्यक्ष बनना चाहते थे। लेकिन, मुलायम सिंह यादव ने प्रोफेसर रामगोपाल को जिला परिषद का अध्यक्ष बनवा दिया था। इसको लेकर बाबूजी का मुलायम सिंह से 20 साल तक मतभेद रहा।
पहले बेमिसाल दोस्ती और फिर कांटे की टक्कर को लेकर मुलायम सिंह यादव और दर्शन सिंह के रिश्ते अक्सर चर्चा में रहते थे। मुलायम सिंह से अनबन के बाद 1989 कांग्रेस में शामिल हुए बाबू दर्शन सिंह ने जसवंतनगर विधानसभा सीट से 1989, 1991,1993 और 1996 में कांग्रेस के टिकट पर मुलायम सिंह और शिवपाल के खिलाफ चुनाव लड़ा। 1996 का चुनाव ही शिवपाल ने लड़ा था, बाकी के चुनाव में दर्शन सिंह का सामना मुलायम सिंह से होता रहा। 1993 के चुनाव में दर्शन सिंह ने मुलायम सिंह को कांटे की टक्कर दी। महज 1161 वोटों से मुलायम सिंह को जीत मिल सकी थी।
बाबूजी का जिला परिषद के चुनाव में मुलायम सिंह से मतभेद हो गया था। वे जिला परिषद के अध्यक्ष बनना चाहते थे। लेकिन, मुलायम सिंह यादव ने प्रोफेसर रामगोपाल को जिला परिषद का अध्यक्ष बनवा दिया था। इसको लेकर बाबूजी का मुलायम सिंह से 20 साल तक मतभेद रहा।
पहले बेमिसाल दोस्ती और फिर कांटे की टक्कर को लेकर मुलायम सिंह यादव और दर्शन सिंह के रिश्ते अक्सर चर्चा में रहते थे। मुलायम सिंह से अनबन के बाद 1989 कांग्रेस में शामिल हुए बाबू दर्शन सिंह ने जसवंतनगर विधानसभा सीट से 1989, 1991,1993 और 1996 में कांग्रेस के टिकट पर मुलायम सिंह और शिवपाल के खिलाफ चुनाव लड़ा। 1996 का चुनाव ही शिवपाल ने लड़ा था, बाकी के चुनाव में दर्शन सिंह का सामना मुलायम सिंह से होता रहा। 1993 के चुनाव में दर्शन सिंह ने मुलायम सिंह को कांटे की टक्कर दी। महज 1161 वोटों से मुलायम सिंह को जीत मिल सकी थी।