कानपुरः बीते तीन वर्षों की तुलना में इस वर्ष सर्वाधिक 63 ट्रेनों के एसी फेल होने की घटनाएं हुईं हैं। इसकी वजह बनी है मेंटीनेंस में लापरवाही और ट्रेनों की लेटलतीफी। इसके अलावा ज्यादातर ट्रेनों को घंटों आउटर में खड़ा रखने से एसी कोच की बैट्रियां चार्ज नहीं हो सकी। ऐसे में इन ट्रेनों के एसी फेल हो गए।
दुर्घटना के डर से व्यवस्था चरमराई
ट्रेन दुर्घटनाओं के बाद रेलवे की व्यवस्था बेपटरी हो गई है। ‘दुर्घटना से देर भली’ की तर्ज पर काम करने के कारण ट्रेनें इतनी लेट हो गईं कि मुसाफिरों की परेशानी कई गुना बढ़ गई। कभी मेंटीनेंस के नाम पर ब्लॉक लेने के कारण ट्रेनों की लेटलतीफी को वजह बताया गया तो कभी ट्रैक पर ट्रैफिक लोड अधिक बताया गया।
ट्रेनों की गति कम होने से शेड्यूल गड़बड़ाया तो आउटर पर ही ठहराव बढने लगे। ऐसे में एसी कोच की बैट्रियां डिस्चार्ज होने लगीं। बैट्रियों की मरम्मत की व्यवस्था न होना भी इसकी एक वजह है। इसे लेकर यात्रियों में गहरी नाराजगी है।
पांच मई से पांच जून के बीच कानपुर सेंट्रल से चलने और गुजरने वाली 63 ट्रेनों के कोच के एसी फेल होने की घटनाएं सामने आईं। इसमें कानपुर से चलने वाली रिवर्स शताब्दी एक्सप्रेस, रांची राजधानी और सियालदह राजधानी एक्सप्रेस जैसी ट्रेनें शामिल हैं। वहीं वर्ष 2017 में इस दौरान 31 ट्रेनों, 2016 में 19 और 2015 में 17 ट्रेनों में एसी फेल होने की घटनाएं हुईं थीं।