'हिंदुत्व की रक्षा' की रक्षा को लेकर कुछ ऐसा है आरएसएस का प्लान
संघ की तरफ से इस दौड़ के आयोजन की तैयारी भी शुरू हो गई है। आरएसएस के दृष्टिकोण से कानपुर जनपद को 40 नगरों में बांटा गया है। यह दौड़ इन सभी नगरों से होकर गुजरेगी। कहा जा रहा है कि इस दौड़ के माध्यम से शहर से गांव को जोड़ना है। इसके जरिए एक साथ रहने, देश और हिंदुत्व की रक्षा करने, धर्मनिष्ठ बनने का संदेश भी दिया जाएगा। संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख अनुपम ने बताया कि यह दौड़ छोटे- छोटे टुकड़ों में जगह-जगह आयोजित होगी। संघ इस दौड़ को मैराथन दौड़ के समकक्ष बता रहा है। इस दौड़ के पीछे शिवाजी से जुड़ी पनालगढ़ किले के पावन खिंड की कहानी भी बताई जाएगी।
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छत्रपति शिवाजी अपने 800 सैनिकों के साथ पनालगढ़ के किले में थे। किले को 5000 मुगल सैनिकों ने घेर रखा था। एक ऐसा पतला कठिन कीचड़ वाला रास्ता जिससे कोई जा नहीं सकता था, ऐसा मुगल भी समझते थे। उसी रास्ते से शिवाजी अपने 600 सैनिकों के साथ अस्त्र-शस्त्र समेत 52 किलोमीटर दूर विशालगढ़ किले के लिए निकले। इसमें एक नकली शिवाजी भी बनाए गए थे।
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आगे रास्ते में नकली शिवाजी की तरफ मुगल सैनिक भटक गये। शिवाजी के सेनापति बाजीराव प्रभु कुछ सैनिकों के साथ मुगलों को रोकने में लग गए। उन्होंने शिवाजी से कहा विशालगढ़ पहुंच कर तोप दाग कर पहुंचने का संकेत करना, तब तक मैं मुगल सैनिकों को रोकता हूं। शिवाजी संघर्ष करते हुए विशालगढ़ पहुंच गये और तोप दागी तोप की आवाज सुनने के बाद युद्धरत बाजीराव प्रभु शहीद हो गए। बाजीराव प्रभु जहां शहीद हुए उस स्थान को घोर खिंड कहा जाता था, अब उसे पावन खिंड के नाम से जाना जाता है।