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'हिंदुत्व की रक्षा' की रक्षा को लेकर कुछ ऐसा है आरएसएस का प्लान

Tue, 07 Aug 2018 12:04 AM IST
पंकज प्रसून, अमर उजाला, कानपुर
पंकज प्रसून, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 07 Aug 2018 12:04 AM IST
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Rashtriya svayam sewak sangh plan for Hindutva protection
आरएसएस - फोटो :
जनता से सीधे जुड़ने के लिए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने एक के बाद एक गतिविधियां तेज कर दी हैं। संघ इन गतिविधियों को भले आगामी लोकसभा चुनाव से ना जोड़ रहा हो लेकिन लोगों तक जो संदेश पहुंच रहा है, उसे लेकर राजनीतिक गलियारों में काफी हलचल है। पिछले दिनों संघ ने अक्टूबर में वीर शिवाजी की याद में कानपुर में महानाट्य के आयोजन की घोषणा की थी। अब उसमें एक कड़ी और जुड़ गई है। जाणता राजा महानाट्य से पहले मैराथन जैसी लंबी दौड़ आयोजित की जाएगी, जिसे पावन खिंड दौड़ नाम दिया गया है। यह दौड़ भी कानपुर से शुरू होगी। कहा जा रहा है कि इस तरह की दौड़ संघ पूरे देश में आयोजित करेगा।


आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- कानपुर जनपद को 40 नगरों में बांटा गया...

 

Rashtriya svayam sewak sangh plan for Hindutva protection
प्रतीकात्मक तस्वीर

संघ की तरफ से इस दौड़ के आयोजन की तैयारी भी शुरू हो गई है। आरएसएस के दृष्टिकोण से कानपुर जनपद को 40 नगरों में बांटा गया है। यह दौड़ इन सभी नगरों से होकर गुजरेगी। कहा जा रहा है कि इस दौड़ के माध्यम से शहर से गांव को जोड़ना है। इसके जरिए एक साथ रहने, देश और हिंदुत्व की रक्षा करने, धर्मनिष्ठ बनने का संदेश भी दिया जाएगा। संघ के प्रांत प्रचार प्रमुख अनुपम ने बताया कि यह दौड़ छोटे- छोटे टुकड़ों में जगह-जगह आयोजित होगी। संघ इस दौड़ को मैराथन दौड़ के समकक्ष बता रहा है। इस दौड़ के पीछे शिवाजी से जुड़ी पनालगढ़ किले के पावन खिंड की कहानी भी बताई जाएगी। 
 
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- यह है पावन खिंड दौड़ का इतिहास ...

Rashtriya svayam sewak sangh plan for Hindutva protection
संघ - फोटो : self

छत्रपति शिवाजी अपने 800 सैनिकों के साथ पनालगढ़ के किले में थे। किले को 5000 मुगल सैनिकों ने घेर रखा था। एक ऐसा पतला कठिन कीचड़ वाला रास्ता जिससे कोई जा नहीं सकता था, ऐसा मुगल भी समझते थे। उसी रास्ते से शिवाजी अपने 600 सैनिकों के साथ अस्त्र-शस्त्र समेत 52 किलोमीटर दूर विशालगढ़ किले के लिए निकले। इसमें एक नकली शिवाजी भी बनाए गए थे।
आगे की स्लाइड में पढ़ेंः- मुगल सैनिक भटक गये...

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Rashtriya svayam sewak sangh plan for Hindutva protection
संघ

आगे रास्ते में नकली शिवाजी की तरफ  मुगल सैनिक भटक गये। शिवाजी के सेनापति बाजीराव प्रभु कुछ सैनिकों के साथ मुगलों को रोकने में लग गए। उन्होंने शिवाजी से कहा विशालगढ़ पहुंच कर तोप दाग कर पहुंचने का संकेत करना, तब तक मैं मुगल सैनिकों को रोकता हूं। शिवाजी संघर्ष करते हुए विशालगढ़ पहुंच गये और तोप दागी तोप की आवाज सुनने के बाद युद्धरत बाजीराव प्रभु शहीद हो गए। बाजीराव प्रभु जहां शहीद हुए उस स्थान को घोर खिंड कहा जाता था, अब उसे पावन खिंड के नाम से जाना जाता है।

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