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सीएसजेएमयू पूर्व छात्र सम्मेलन: राष्ट्रपति ने दिए एक लाख 11 हजार रुपए, पूर्व छात्रों से मांगा योगदान
Sat, 30 Nov 2019 09:41 PM IST
शिखा पांडेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Sat, 30 Nov 2019 09:41 PM IST
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सीएसजेएमयू पूर्व छात्र सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के पूर्व छात्र सम्मेलन में राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पूर्व छात्रों से विश्वविद्यालय को बेहतर बनाने में योगदान मांगा। इसके लिए एंडोवमेंट फंड (बंदोबस्ती कोष) बनाने की शुरुआत करते हुए उन्होंने पूर्व छात्र के रूप में एक लाख 11 हजार रुपये की धनराशि का चेक राज्यपाल आनंदी बेन पटेल को सौंपा।
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सीएसजेएमयू पूर्व छात्र सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति नहीं पूर्व छात्र के रूप में आया हूं
राष्ट्रपति ने कहा कि वह यहां राष्ट्रपति के रूप में नहीं, बल्कि पूर्व छात्र होने के नाते आए हैं। सीएसजेएमयू में पूर्व में आयोजित हुए दीक्षांत समारोह में न आने की वजह का जिक्र करते हुए बताया कि 2018 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने उन्हें आमंत्रित किया। इस पर उन्होंने राष्ट्रपति की मर्यादा का हवाला देते हुए आने से मना कर दिया था। उस मर्यादा का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वह देश के 150 से अधिक केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विजिटर भी हैं। केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने इसी मर्यादा का हवाला देते हुए राज्य विश्वविद्यालय में न जाने का आग्रह किया था। इसी वजह से वह पूर्व में नहीं आ पाए। जब सीएसजेएमयू की कुलपति प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता ने उन्हें (राष्ट्रपति) आमंत्रित किया तो उन्होंने खुद को पूर्व छात्र की हैसियत से बुलाने के लिए कहा। आज वह यहां पूर्व छात्र की हैसियत से आए हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि वह यहां राष्ट्रपति के रूप में नहीं, बल्कि पूर्व छात्र होने के नाते आए हैं। सीएसजेएमयू में पूर्व में आयोजित हुए दीक्षांत समारोह में न आने की वजह का जिक्र करते हुए बताया कि 2018 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक ने उन्हें आमंत्रित किया। इस पर उन्होंने राष्ट्रपति की मर्यादा का हवाला देते हुए आने से मना कर दिया था। उस मर्यादा का उल्लेख करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि वह देश के 150 से अधिक केंद्रीय विश्वविद्यालयों के विजिटर भी हैं। केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपतियों ने इसी मर्यादा का हवाला देते हुए राज्य विश्वविद्यालय में न जाने का आग्रह किया था। इसी वजह से वह पूर्व में नहीं आ पाए। जब सीएसजेएमयू की कुलपति प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता ने उन्हें (राष्ट्रपति) आमंत्रित किया तो उन्होंने खुद को पूर्व छात्र की हैसियत से बुलाने के लिए कहा। आज वह यहां पूर्व छात्र की हैसियत से आए हैं।
सीएसजेएमयू पूर्व छात्र सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
यह प्रोटोकॉल वाले बीएनएसडी जाने नहीं देते
राष्ट्रपति ने जिस विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की, उसी के पूर्व छात्र सम्मेलन में शामिल होकर वह पुरानी यादों में खो गए। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भी बीएनएसडी इंटर कॉलेज में पढ़े थे। उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए गर्व की बात है कि वहीं से मैंने भी इंटर की शिक्षा ली। कहा कि उनका मन कई बार बीएनएसडी इंटर कॉलेज जाने का होता है, लेकिन यह प्रोटोकॉल वाले वहां जाने नहीं देते। कानपुर आने के दौरान उन्होंने एक बार तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक को रास्ते में जाते हुए बीएनएसडी इंटर कॉलेज दिखाया था। तब राज्यपाल ने एक मिनट के लिए गाड़ी रुकवाई और कॉलेज देखते हुए बोले कि ये ठीक है। वीआईपी रोड से निकलने पर डीएवी कॉलेज जरूर दिख जाता है। फरवरी के दौरे का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उस समय अपने तीन शिक्षकों को सम्मानित करने का उन्हें अवसर मिला था।
राष्ट्रपति ने जिस विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई की, उसी के पूर्व छात्र सम्मेलन में शामिल होकर वह पुरानी यादों में खो गए। उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय भी बीएनएसडी इंटर कॉलेज में पढ़े थे। उन्होंने कहा कि यह मेरे लिए गर्व की बात है कि वहीं से मैंने भी इंटर की शिक्षा ली। कहा कि उनका मन कई बार बीएनएसडी इंटर कॉलेज जाने का होता है, लेकिन यह प्रोटोकॉल वाले वहां जाने नहीं देते। कानपुर आने के दौरान उन्होंने एक बार तत्कालीन राज्यपाल राम नाईक को रास्ते में जाते हुए बीएनएसडी इंटर कॉलेज दिखाया था। तब राज्यपाल ने एक मिनट के लिए गाड़ी रुकवाई और कॉलेज देखते हुए बोले कि ये ठीक है। वीआईपी रोड से निकलने पर डीएवी कॉलेज जरूर दिख जाता है। फरवरी के दौरे का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उस समय अपने तीन शिक्षकों को सम्मानित करने का उन्हें अवसर मिला था।
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सीएसजेएमयू पूर्व छात्र सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
नहीं जानता था कि अजित डोभाल कानपुर से पढ़े हैं
राष्ट्रपति ने डीएवी कॉलेज और सीएसजेएमयू से पढ़े हुए पूर्व छात्रों के नाम भी लिए। राष्ट्रपति ने कहा कि यहां से पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, गोपाल दास नीरज, कन्हैयालाल नंदन, प्रोफेसर एसएस कटियार, केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, एडमिरल विष्णु भागवत और शिक्षाविद रेनू ठाकोर जैसी हस्तियां पढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि अजित डोभाल के बारे में नहीं जानते थे कि वह कानपुर से पढ़े हैं। दिल्ली में हुई एक मुलाकात का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उस समय अजित डोभाल ने ही बताया था कि जिस विश्वविद्यालय से आपने शिक्षा प्राप्त की है, वहीं से वह भी पढ़े हैं।
राष्ट्रपति ने डीएवी कॉलेज और सीएसजेएमयू से पढ़े हुए पूर्व छात्रों के नाम भी लिए। राष्ट्रपति ने कहा कि यहां से पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी, गोपाल दास नीरज, कन्हैयालाल नंदन, प्रोफेसर एसएस कटियार, केंद्रीय मंत्री हर्षवर्धन, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल, एडमिरल विष्णु भागवत और शिक्षाविद रेनू ठाकोर जैसी हस्तियां पढ़ी हैं। उन्होंने कहा कि अजित डोभाल के बारे में नहीं जानते थे कि वह कानपुर से पढ़े हैं। दिल्ली में हुई एक मुलाकात का जिक्र करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उस समय अजित डोभाल ने ही बताया था कि जिस विश्वविद्यालय से आपने शिक्षा प्राप्त की है, वहीं से वह भी पढ़े हैं।
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सीएसजेएमयू पूर्व छात्र सम्मेलन
- फोटो : अमर उजाला
टॉप-10 विश्वविद्यालयों में शामिल हो सीएसजेएमयू
सीएसजेएमयू शीर्ष 17 विश्वविद्यालयों में शामिल है। इस पर राष्ट्रपति ने कुलपति प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता से कहा कि वह इस तरह से प्रयास करें कि सात वर्ष बाद जब विश्वविद्यालय की स्थापना का 60वां वर्ष मनाया जाए, तब इसकी गणना टॉप-10 विश्वविद्यालयों में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां की विरासत को सहेजना और उसे आगे बढ़ाने का काम भी करना है।
सीएसजेएमयू शीर्ष 17 विश्वविद्यालयों में शामिल है। इस पर राष्ट्रपति ने कुलपति प्रोफेसर नीलिमा गुप्ता से कहा कि वह इस तरह से प्रयास करें कि सात वर्ष बाद जब विश्वविद्यालय की स्थापना का 60वां वर्ष मनाया जाए, तब इसकी गणना टॉप-10 विश्वविद्यालयों में होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि यहां की विरासत को सहेजना और उसे आगे बढ़ाने का काम भी करना है।