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चुनावी यादेंः जब सियासी जादूगर मुलायम सिंह के गढ़ में हुई सपा की दुर्दशा, कहानी चार वोट की

Mon, 01 Apr 2019 06:22 PM IST
प्रशांत कुमार यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रशांत कुमार Updated Mon, 01 Apr 2019 06:22 PM IST
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political memory related to mulayam singh yadav lok sabha election 2019
मुलायम सिंह यादव व अखिलेश यादव (फाइल फोटो)
इटावा जिले को सपा का गढ़ माना जाता है और मुलायम सिंह यादव को यहां का सियासी जादूगर। उनका अंदाज यहां वोटरों के सिर चढ़कर बोलता रहा है। पार्टी ने इस सीट पर लगातार डेढ़ दशक तक अपना जलवा कायम रखा है। सपा की इस कामयाबी का जिक्र करने के पीछे वजह यह कि वोटरों में विरासत के तौर पर राजनीतिक पैठ हमेशा कायम रहेगी, यह कतई जरूरी नहीं है। 2014 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ भी यही हुआ है। सपा प्रत्याशी प्रेमदास कठेरिया को करीब पौने दो लाख वोटों से जो करारी शिकस्त मिली थी। वह उन दर्जनों गांवों के लोगों की नाराजगी का नतीजा रही। जहां मिले वोट दहाई का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाए थे।
political memory related to mulayam singh yadav lok sabha election 2019
मुलायम सिंह यादव, अखिलेश यादव (फाइल फोटो)
खास बात यह कि सपा की हार का कारण बने यह वह क्षेत्र रहे जहां समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी सम्मानजनक वोट हासिल करते रहे हैं। 2014 लोकसभा चुनाव के दो साल पहले सपा सत्ता पर काबिज हो चुकी थी। मुलायम सिंह यादव की राजनीतिक विरासत उनके पुत्र अखिलेश यादव सीएम बनकर बखूबी संभाल चुके थे। जिले में सपा के सबसे अधिक ग्राम प्रधान, बीडीसी व सभासद आदि अन्य जनप्रतिनिधि भी रहे थे। इसके बाद भी सपा ने न सिर्फ अपनी सीट गंवाई थी बल्कि कई क्षेत्रों में बेहद शर्मनाक प्रदर्शन रहा था। 
 
political memory related to mulayam singh yadav lok sabha election 2019
अखिलेश यादव व मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो) - फोटो : amar ujala
वोटरों की नजर में पार्टी के इस लचर के प्रदर्शन के पीछे मोदी लहर के अलावा बतौर मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की जिले से दूरियां भी जिम्मेदार रही हैं। जहां विरोधी भी मुलायम सिंह यादव की इस शैली के कायल रहे कि वह सीएम बनने के बाद भी मौका निकाल कर यहां लोगों की बीच आते जाते रहे। भेंट करते रहे और उनकी कुशलक्षेम पूंछते रहे।
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अखिलेश यादव व मुलायम सिंह यावद (फाइल फोटो)
अखिलेश यादव आने जाने और लोगों के बीच पैठ बनाने में इसके उलट रहे। राजनीतिक पंडितों के मुताबिक नाराज वोटरों ने मोदी के रूप में मिले विकल्प को सपा के खिलाफ मौके के तौर पर इस्तेमाल किया। सदर विधानसभा सीट से जुड़ा गढ़िया मुलूसिंह गांव अन्य कारणों के साथ इस वजह का भी एक उदाहरण हो सकता है।

 
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अखिलेश यादव व मुलायम सिंह यादव (फाइल फोटो)
वह क्षेत्र जहां सपा का रहा था लचर प्रदर्शन
मतदान केंद्र गढ़िया मुलूसिंह में महज 4, फूफई बड़ी में 5, नगला बंधा में 7, सितौरा व बरौली जगनपार में 8-8, पूठन सकरौली व बुलाकीपुर लुहन्ना में 9-9, दौलतपुर में 14, रतनूपुरा में 15, सदर तहसील में 18, बम्हनपुर भगवतीपुर व कुंडेश्वर में 19-19, पचदेवरा में 20, छोटी फूफई व चांदनपुर में 21-21, नगला उदई में 23, धूमनपुुुरा व हड़ौली में 24-24, गढ़िया गुलाब सिंह में 31, धिमरई में 32, दबग्रान रोड, खालसा स्कूल व मदायन में 34-34, पुरा मुरौंग में 36, नगला कछार में 37, नावली व शाहकमर में 38, कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज व गाड़ीपुरा में 40-40, अर्चना मैमोरियल में 43, मानिकपुर विसू व रायपुर सितौरा में 45-45, इस्लामियां व शोरावाल कॉलेज में 48-48, ज्ञानचंद इकदिल में 49 वोट ही 2014 लोकसभा चुनाव में सपा प्रत्याशी प्रेमदास कठेरिया को हुए थे।
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