PHOTOS: आज इस हाल में जी रहा 'बैंडिट क्वीन' फूलन देवी का परिवार
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पूर्व दस्यु सुंदरी फूलन देवी की जीवनी से प्रभावित होकर यूनिवर्सिटी आफ इंस्टागिलियर इंग्लैंड से रिटायर्ड गणित प्रोफेसर मुकुल लाल मंगलवार को फूलन के गांव शेखपुर गुढ़ा स्थित घर पर पहुंचे। फूलन की जिदंगी के बारे में उनकी मां से जानकारी चाही तो उन्होंने दुर्व्यवहार कर दिया था। फूलन की मां मुला देवी ने अपशब्द कहकर मुकुल को पत्थर लेकर दौड़ाया। प्रोफेसर फिर भी नहीं माने। उसके बाद फूलन की बहन रामकली से मुलाकात कर फूलन देवी के दस्यु से लेकर सांसद तक के सफर को जाना और आर्थिक सहायता भी प्रदान की।
इंग्लैंड निवासी मुकुल लाल गांव में पुलिस सुरक्षा में पहुंचे थे। प्रोफेसर ने बताया कि उन्होंने फूलन देवी पर लिखी गई किताबों तथा समाचार पत्रों के माध्यम से पूर्व दस्यु सुंदरी के बारे में जानकारियां एकत्रित की हैं और इसको लेकर वह एक शोध कर रहे हैं। इसी उद्देश्य से वह फूलन देवी के गांव आए हैं। कभी जिस फूलन का नाम सुनते ही लोग कांप उठते थे आज उसी की मां दाने-दाने को तरस रही है। एक समय ऐसा था जब फूलन की एक आवाज पर लोगों के घरों में अनाज पहुंच जाता था, भू्खों के पेट भरते थे। आज उसी की मां को भूखी रह रही है। यही नहीं लोग डकैत की मां कहकर ताने देते हैं। ये हाल है फूलन की मां मूला देवी का। बेटी के जाने के बाद वो किस तरह की जिंदगी जी रही है। इस स्टोरी से आपको जानने को मिल जाएगा।
फूलन की शादी ग्यारह साल की उम्र में हुई थी लेकिन उनके पति पुत्तीलाल और पुत्तीलाल के परिवार ने उन्हें छोड़ दिया था। फूलन देवी के पहले पति पुत्ती लाल की उम्र करीब 75 साल है।पुत्तीलाल काफी वृद्ध हो चुके हैं और उन्हें ठीक से नहीं याद है कि किस साल में उनकी शादी फूलन देवी से हुई थी। पुत्तीलाल के मुताबिक सत्तर के दशक के आसपास उनकी शादी हुई थी। कुछ सालों तक फूलन देवी उनके साथ रहीं। पुत्तीलाल ने कहा कि अब बीहड़ों में पहले जैसी दहशत नहीं रहती। एक समय था जब फूलन देवी के नाम से पूरा इलाका थर्राता था। फूलन देवी मायके से ही डकैत बनकर आई थी।
फूलन के दूसरे पति उमेद सिंह का नाम सक्रिय राजनीति में आता है। हालांकि वे कहते हैं कि वे सिर्फ एकलव्य सेना का काम ही आगे बढ़ाना चाहेंगे। इसलिए वो अपनी पत्नी फूलन देवी द्वारा संगठित एकलव्य सेना के कामकाज पर ही ध्यान दे रहे हैं। बताते चलें कि उमेद सिंह अब दिल्ली में रहते हैं। उन्होंने पिछला चुनाव मायावती की पार्टी बीएसपी से लड़ा था और अभी भी उसके सदस्य हैं। उनका कहना है कि वे पार्टी नेतृत्व के आदेश पर ही पार्टी का काम भी देखते हैं।