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'रामबाबू' से दो बार हारा कैंसर, रुला देगी इनके संघर्ष की कहानी
Tue, 05 Feb 2019 03:57 PM IST
शिखा पांडेय
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Tue, 05 Feb 2019 03:57 PM IST
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रामबाबू की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
जो लोग कैंसर का पता चलते ही दिमाग में मौत का साया पैदा कर लेते हैं, उन्हें रामबाबू (54) से जरूर मिलना चाहिए। उन्हें हौसला मिलेगा। राम बाबू को 11 साल की उम्र में गांठों का कैंसर हुआ था, दृढ़ इच्छा शक्ति से किशोरावस्था में ही रामबाबू ने कैंसर का जबड़ा मरोड़ दिया और जिंदगी को अपनी रवानी के साथ जारी रखा।
ऐसा नहीं कि रोग उन्हें एक ही बार हुआ। ठीक होने के 12 साल बाद 23 वर्ष की उम्र में कैंसर ने उन पर फिर हमला किया। रामबाबू फिर जीत गए। इसके बाद उनकी पत्नी मधु गुप्ता को कैंसर हुआ। हौसले से वह भी 18 साल तक कैंसर से लड़ती रहीं और अपना परिवार चलाया। रामबाबू कैंसर रोगियों की काउंसलिंग भी करते हैं।
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ऐसा नहीं कि रोग उन्हें एक ही बार हुआ। ठीक होने के 12 साल बाद 23 वर्ष की उम्र में कैंसर ने उन पर फिर हमला किया। रामबाबू फिर जीत गए। इसके बाद उनकी पत्नी मधु गुप्ता को कैंसर हुआ। हौसले से वह भी 18 साल तक कैंसर से लड़ती रहीं और अपना परिवार चलाया। रामबाबू कैंसर रोगियों की काउंसलिंग भी करते हैं।
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डेमो पिक
जेके कैंसर इंस्टीट्यूट जाकर रामबाबू हमेशा कैंसर रोगियों की काउंसलिंग कर हौसला बढ़ाते हैं। विश्व कैंसर दिवस पर सोमवार को उनसे बात हुई। कैंसर से संघर्ष की जो दास्तान उन्होंने बताई, उसे हम आप से संक्षिप्त में साझा कर रहे हैं। कानपुर के कल्याणपुर में रहने वाले पैथोलोजी लैब टेक्नीशियन रामबाबू का पुश्तैनी घर बिंदकी, फतेहपुर में है।
पिता गल्ले का काम करते थे। वर्ष 1976 में जब रामबाबू 11 साल के थे, तब पहली बार उन्हें गांठों के कैंसर का पता चला। दृढ़ हौसला रखा और दवा खाई, कैंसर ठीक हो गया। इसके बाद वह पढ़ाई में जुट गए।
पिता गल्ले का काम करते थे। वर्ष 1976 में जब रामबाबू 11 साल के थे, तब पहली बार उन्हें गांठों के कैंसर का पता चला। दृढ़ हौसला रखा और दवा खाई, कैंसर ठीक हो गया। इसके बाद वह पढ़ाई में जुट गए।
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डीएवी से बीएससी किया और नर्सिंगहोम में काम करने लगे। इसी बीच जंग हारा कैंसर शरीर में घात लगाए रहा। वर्ष 1988 में उन्हें तिल्ली (स्प्लीन) का कैंसर हो गया। दवाओं के साथ वह फिर कैंसर से लड़े और रोग को हरा दिया।
बड़े भाई होने के नाते उन्होंने अपने तीन छोटे भाइयों और बहन की शादी की। इस दौरान उनकी मधु गुप्ता से शादी हुई। दो बेटियों के पिता बने। एक की शादी हो गई है और दूसरी छोटी बेटी की इसी महीने 10 फरवरी को शादी है। बताते हैं कि उनकी पत्नी मधु को भी बच्चेदानी का कैंसर हो गया था। वह भी रोग से लड़ीं।
बड़े भाई होने के नाते उन्होंने अपने तीन छोटे भाइयों और बहन की शादी की। इस दौरान उनकी मधु गुप्ता से शादी हुई। दो बेटियों के पिता बने। एक की शादी हो गई है और दूसरी छोटी बेटी की इसी महीने 10 फरवरी को शादी है। बताते हैं कि उनकी पत्नी मधु को भी बच्चेदानी का कैंसर हो गया था। वह भी रोग से लड़ीं।
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बीते साल 24 अगस्त को उनका निधन हो गया। रामबाबू का कहना है कि दृढ़ इच्छा शक्ति रखें, दिमाग में कैंसर का खौफ न लाएं और दवा करें। रोग को हावी न होने दें, जीने की इच्छा कैंसर से अधिक मजबूत होती है।
इन लक्षणों का रखें ध्यान
- शरीर के किसी अंग पर नया बदलाव दिखे।
- स्तन में गांठों का अहसास हो।
- मासिक धर्म में अधिक ब्लीडिंग और दर्द हो।
- मुंह कम खुले, भूरे और लाल चकत्ते नजर आएं।
-15 दिन से अधिक मुंह का कोई घाव ठीक न हो ।
इन लक्षणों का रखें ध्यान
- शरीर के किसी अंग पर नया बदलाव दिखे।
- स्तन में गांठों का अहसास हो।
- मासिक धर्म में अधिक ब्लीडिंग और दर्द हो।
- मुंह कम खुले, भूरे और लाल चकत्ते नजर आएं।
-15 दिन से अधिक मुंह का कोई घाव ठीक न हो ।