मोबाइल एडिक्शनः जिद पर अड़ी पत्नी बोली- बच्चों को रख लो, उसके पास जाउंगी
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केस- दो: एक छात्र को अब नींद नहीं आती। मोबाइल फोन पर सोशल मीडिया में सर्फिंग किए बिना उसे बेचैनी रहती है। खाना कम हो गया है। व्यावहार में बदलाव आ गया है। परीक्षा में अंक बहुत कम आए हैं। मिजाज में चिड़चिड़ापन और गुस्सा जल्दी आता है। उसे आवाजें सुनाई पड़ती हैं। घरवाले उसे मनोरोग विशेषज्ञ के पास लाए तो इलाज शुरू हो गया।
सोशल मीडिया और मोबाइल फोन एडिक्शन के ये दो मामले तो बानगी भर हैं। रात-दिन मोबाइल पर चिपके रहने से स्थिति और बिगड़ी गई है। सेहत के नुकसान के साथ ही इससे पारिवारिक कलह और तलाक के मामले बढ़ गए हैं। इन हालातों के मद्देनजर इंडियन साइकिएट्रिक सोसाइटी ने नई गाइडलाइन जारी की है।
सोसाइटी के सेंट्रल जोन अध्यक्ष वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञ डॉ.रवि कुमार का कहना है कि गाइडलाइन में टीवी देखने, मोबाइल फोन पर सर्फिंग करने के अधिकतम दो घंटे निश्चित कर दिए गए हैं। इससे अधिक समय सोशल मीडिया को देना नुकसानदेह है।