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उम्रकैद की सजा के बाद हत्यारे विधायक ने लगाया जनता दरबार, वो नरसंहार आज भी इस परिवार को रुलाता है
Sun, 21 Apr 2019 11:03 AM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बांदा/हमीरपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, बांदा/हमीरपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sun, 21 Apr 2019 11:03 AM IST
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विधायक अशोक सिंह चंदेल ने लगाया जनता दरबार
- फोटो : अमर उजाला
यूपी में हमीरपुर जिले के चर्चित सामूहिक हत्याकांड में भाजपा विधायक अशोक सिंह चंदेल समेत सभी 10 आरोपियों को हमीरपुर की निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) द्वारा इस आधार पर बरी कर दिया गया था कि एफआईआर देर से की गई। इसके साथ ही घटना का कोई उद्देश्य नहीं था। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में ट्रायल कोर्ट की इस दलील को ही खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट में बहस के दौरान विधायक अशोक सिंह चंदेल की तरफ से कोई बहस नहीं की गई।
विधायक अशोक चंदेल
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि जहां घटना करने वाले बड़ी संख्या में हों, वहां दो या तीन गवाहों की गवाही सजा करने के लिए पर्याप्त है। इस चर्चित हत्याकांड की इलाहाबाद हाईकोर्ट में सुनवाई की शुरुआत 8 नवंबर 2017 से हुई थी। अभियुक्तों की ओर से लगभग एक दर्जन अधिवक्ताओं ने पैरवी की। उधर, प्रदेश सरकार द्वारा ट्रायल कोर्ट के फैसले के विरुद्ध दायर की गई अपील में अधिवक्ता लक्ष्मण सिंह और मुरलीधर मिश्रा ने पैरवी की।
रघुवीर सिंह
- फोटो : अमर उजाला
19 अप्रैल (शुक्रवार) को न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति दिनेश कुमार सिंह की दो सदस्यीय बेंच ने इसका फैसला सुनाया। अपने 131 पृष्ठ के आदेश/फैसले में न्यायाधीशों ने यह भी कहा कि प्रदेश सरकार की ओर से दायर की गई अपील का आधार यह है कि ट्रायल कोर्ट ने एफआईआर विलंब से किया जाना और घटना का कोई उद्देश्य न होना बताया। साथ ही सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट की तमाम नजीरों का हवाला देकर प्रदेश सरकार ने अपनी अपील में ट्रायल कोर्ट का आदेश निरस्त करने की मांग की थी।
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आशुतोष सिंह
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट ने फैसले में मेनोका मलिक बनाम पश्चिम बंगाल में दी गई व्यवस्था का हवाला देकर कहा कि जहां पर बड़ी संख्या में घटना करने वाले हों, वहां घटना के दो या तीन गवाहों की गवाही भी सजा करने के लिए पर्याप्त मानी जाएगी। उनकी गवाही को विश्वसनीय माना जाएगा। जब तक गवाही पूर्ण रूप से झूठी साबित न हो। हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियुक्तों ने नाजायज मजमा (भीड़) कायम करते हुए प्राणघातक हथियारों से लैस पूरी तैयारी के साथ आए थे और एकराय होकर परिवार (वादी) और उसके दोस्तों को जान से मारने की घटना अंजाम दी।
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रुक्कू
- फोटो : अमर उजाला
हाईकोर्ट ने अभियुक्त रघुवीर सिंह, आशुतोष सिंह उर्फ डब्बू सिंह, उत्तम सिंह, प्रदीप सिंह, अशोक सिंह चंदेल, नसीम, श्याम सिंह, साहब सिंह, झंडू और पान सिंह को धारा 148, 302/149, 307/149 में दोषी ठहराया। अलग-अलग धाराओं में अलग-अलग जेल और जुर्माने की सजाएं दीं। हाईकोर्ट ने अभियुक्त अशोक सिंह चंदेल के विरुद्ध धारा 379 और 404 का अपराध सिद्ध होना नहीं पाया। अदालत में बहस के दौरान अशोक सिंह चंदेल की तरफ से कोई बहस नहीं की गई।