लड़कियों के 'उन दिनाें के लिए' डाॅक्टराें ने दी सलाह, कहा-घबराने की नहीं है जरूरत
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मासिक धर्म के दिनों में छात्राएं असहज हो जाती हैं। इन दिनों वह माता-पिता और शिक्षिकाओं से भी खुलकर बात नहीं करती हैं। इसकी वजह से उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ता है। यह बात गुरुवार को हडर्ड हाईस्कूल सिविल लाइंस में त्याग एवं थ्री-डी संस्था की ओर से किशोरावस्था पर आयोजित कार्यशाला में डॉ. दीक्षा पांडेय ने छात्राओं से कही।
कार्यशाला में डॉ. अवध दुबे ने बताया कि इस कारण कई बार छात्राएं कुंठा में आ जाती हैं या फिर बीमार पड़ जाती हैं। इस दौरान छात्रों ने नाटक के मंचन से दिखाया कि कैसे मासिक धर्म के दौरान छात्राएं असहज होने की जगह परिजनों से खुलकर बात करें और खुद को नकारात्मक नजरिये से नहीं देखें। छात्रों ने तालियां बजाकर नाटक की सराहना की।
इसके बाद डॉ. किरन पांडेय, हडर्ड के प्रधानाचार्य विनसेंट ने छात्रों को मोटीवेशनल स्पीच दी और छात्रों ने वहां मौजूद एक्सपर्ट से खुलकर सवाल पूछे। इसमें बीएनएसडी शिक्षा निकेतन, बीएनएसडी बालिका इंटर कॉलेज, ओंकारेश्वर सरस्वती शिक्षा निकेतन इंटर कॉलेज, सेठ आनंदराम जयपुरिया स्कूल, मैथाडिस्ट स्कूल, पूर्णचंद विद्या निकेतन, डीपीएस आजाद नगर, एलेन हाउस स्कूल के छात्र शामिल हुए।