शरीयत जिसे शरीया कानून और इस्लामी कानून भी कहा जाता है इस्लाम में धार्मिक कानून का नाम है। इस्लाम धर्म के अनुयायियों के लिए
शरीयत इस्लामिक समाज में रहने के तौर-तरीकों, नियमों और कायदों के रूप में कानून की भूमिका निभाता है। जानिए क्या है पूरा मामला।
यूपी के कानपुर में मदरसा अहले सुन्नत फरीदुल उलूम नमक वाली मस्जिद रत्तूपुरवा के चौथे सालाना कॉन्फ्रेंस में बरेली से आए मोहम्मद सलमान मिया कादरी ने कहा कि तीन तलाक एक मजलिस में दिया जाए या अलग से, उसे माना जाएगा। इसे शरीयत का हुक्म बताते हुए उन्होंने कहा कि इसमें किसी तरह की तब्दीली नहीं हो सकती।
सलमान मिया ने कहा कि कुरआन पाक वह किताब है, जो अपने खालिक और मालिक का पता देती है। जिंदगी को संवारने का तरीका बताती है। इसने हमारी जिंदगी की रहनुमाई फरमाई है। शरीयत में तीन तलाक का हुक्म नाजिल हुए 1400 साल से ज्यादा बीत चुके हैं।
दुनिया की कोई ताकत इसे बदल नहीं कर सकती। मुरादाबाद से तशरीफ लाए सैयद शबाहत हुसैन कादरी ने कहा कि मुस्लिम महिलाएं फैशन से परहेज करते हुए अपने पहनावे पर ध्यान दें। इस साल मदरसे से हिफ्ज (बिना देखे कुरआन याद) करने वाले नौ लोगों की दस्तारबंदी हुई। साथ ही उन्हें प्रमाणपत्र भी दिया गया।