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शहीद दीपक के अंतिम दर्शन करने के लिए उमड़े लोग, पिता ने कहा- और बेटे होते तो देश पर न्यौछावर कर देता
Fri, 01 Mar 2019 09:11 AM IST
प्रशांत कुमार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 01 Mar 2019 09:11 AM IST
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शहीद दीपक
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गम-गुस्सा और आक्रोश के साथ बदला लेने की हुंकार भरते हुए कानपुर के लोगों का गुरुवार सुबह से ही शहीद दीपक पांडेय के घर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। देशक्ति के नारों से गूंजता मोहल्ला और हाथों में तिरंगा लिए लोगों की भारी संख्या से गली में पैर रखने तक की जगह न थी। लोगों को बस इंतजार था शहीद के अंतिम दर्शन का। दोपहर करीब 3:30 बजे पार्थिव शरीर घर पहुंचने की खबर से हजारों की संख्या में लोगों को शाम तक घर बाहर मौजूद रहे, लेकिन पार्थिव शरीर देर शाम शहर आ सका।
दीपक पांडेय
इसी बीच सांसद-विधायक के साथ राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों ने भी घर पहुंचकर शहीद के परिजनों को ढाढ़ंस बंधाया। गुरुवार सुबह 6 बजते ही आस-पास के मोहल्ले वाले दीपक के घर पहुंच गए। सभी दीपक की शहादत से दुखी थे लेकिन उनके माता-पिता की चिंता भी थी। कोई हाथ में चाय तो कोई नाश्ता लेकर पहुंचा था। फिर धीरे से कहा कि आपने कल से कुछ खाया नहीं है। ऐसे कैसे चलेगा। न हो तो चाय ही पी लें। अभी पूरा दिन बाकी है, लेकिन कोई भी जबरदस्ती करने की हिममत नहीं जुटा पा रहा था।
दीपक पांडेय
इसके बाद जैसे ही सूरज चढ़ता गया शहीद के अंतिम दर्शन को भीड़ उमड़ती गई। दोपहर बाद हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ घर के बाहर एकत्र थी। हर कोई पाकिस्तान मुर्दाबाद और भारत माता की जय के नारे लगा रहा था। दोपहर बाद लोगों को दीपक के पार्थिव शरीर के देरी से शहर आने की खबर हुई। इस पर अंतिम दर्शनों की इच्छा लिए ही लोग उसकी चित्र पर पुष्प चढ़ाकर लौट गए।
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दीपक पांडेय
मेरा तो एक ही बेटा था और होते तो उन्हें भी देश पर न्यौछावर कर देता। ये शब्द बडगाम हेलीकॉप्टर क्रैश में शहीद दीपक पांडेय के पिता रामप्रकाश पांडेय के हैं, जिन्होंने बुधवार को अपने इकलौते बेटे को खो दिया है। उन्होंने यह बात बृहस्पतिवार को घर पर सांत्वना देने पहुंचे ब्रिगेडियर कंट्रोल डीजीक्यूए सुधींद्र इतनाल और उनकी पत्नी अंजलि से कहे तो हर शख्स का सीना गर्व से चौड़ा हो गया। ब्रिगेडियर ने उन्हें यह कहकर ढांढस बंधाया कि उन्होंने एक लाल खोया है, लेकिन उनकी एक आवाज पर हजारों लाल देश पर मर मिटने को तैयार हैं।
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दीपक पांडेय
इसके बाद भारत माता की जय और दीपक अमर रहें के नारों से पूरा माहौल गूंज उठा। दीपक की मां ब्रिगेडियर की पत्नी अंजलि के सीने से लगकर रो पड़ीं। बोलीं, जाते वक्त कहा था कि इस बार देर से छुट्टी लूंगा और ज्यादा दिन रहूंगा, लेकिन वह तो लंबी छुट्टी पर चला गया।