कानपुर में पिछले छह महीने से मधु कपूर हत्याकांड की गुत्थी उलझी थी। क्राइम ब्रांच की टीम भी खुलासा करने में नाकाम थी। अंधेरे में खूब तीर चलाए लेकिन एक भी निशाने पर नहीं लगा। स्वरूपनगर पुलिस के लिए हत्याकांड केस गले की फांस बना हुआ था। करीब एक महीने पहले डीसीपी पूर्वी की टीम को पता चला कि सनिगवां इलाके के एक सराफ को कुछ चोरी के जेवरात बेचे गए हैं।
मधु कपूर हत्याकांड का खुलासा: पुलिस ने जोड़ी कड़ियां, हत्यारोपियों को पहनाई हथकड़ियां
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जब वह डीसीपी पूर्वी थे तो उनकी टीम के सर्विलांस प्रभारी सुखराम रावत को जानकारी मिली थी कि सनिगवां इलाके में रहने वाले सराफ दीपक पाल को कुछ चोरी के जेवरात बेचे गए हैं। टीम सक्रिय हुई। सराफ से पूछताछ शुरू हुई। कुछ सीसीटीवी फुटेज जुटाए, जिसके जरिये विपिन तक पुलिस पहुंची।
जब विपिन से पूछताछ हुई तो उसने पूरी वारदात बताई। संदीप और गौतम के नाम का भी खुलासा किया। अन्य आरोपियों ने बर्रा के ओशो ज्वैलर्स के मालिक अरविंद गुप्ता व शुक्लागंज के कमल ज्वैलर्स के यहां जेवर बेचे थे। इस तरह से पुलिस ने पहले चोरों की आशंका में तफ्तीश शुरू की थी लेकिन जब परतें खुलीं तो हत्याकांड का खुलासा हो गया।
सराफ फरार, जाएंगे जेल
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि जिस तरह से जेवरात बेचे गए हैं, उससे सराफ को पता था कि चोरी या लूट के जेवरात हैं। इसके बावजूद इन सभी ने जेवरात खरीदे। इन सभी को आरोपी बनाया गया है। दबिश दी गई है लेकिन वह फरार हैं। जल्द उनकी तलाश कर गिरफ्तारी की जाएगी। जानकारी के मुताबिक पूरे गहने करीब चार लाख रुपये के बेचे गए। हालांकि सराफ के पकड़ने जाने पर कीमत स्पष्ट होगी।
आखिर क्यों नाकाम रही सर्विलांस
घटना से संबंधित कई सीसीटीवी फुटेज पुलिस के पास उपलब्ध थे। दोनों बदमाशों के भीतर जाते भी फुटेज थे। बाहर निकले व सड़क के भी फुटेज मिले थे। एक जगह पर बाहर खड़ा शख्स भी दिखाई दे रहा था। यह विपिन था। विपिन ने सिर व मुंह दोनों ढक रखा था। आरोपियों ने बताया कि वह अपने अपने मोबाइल भी लेकर गए थे। वहां से कॉल भी की थी। सवाल है कि आखिर सर्विलांस के जरिये उन तक टीम क्यों नहीं पहुंच सकी। यह सर्विलांस टीम की बड़ी नाकामी थी।