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कहीं 'खस्ते' तो कहीं 'झगड़ालू' हैं बाबा, यहां अजब-गजब हैं महादेव के मंदिरों के नाम

Sat, 19 May 2018 01:46 PM IST
एश्वर्या द्विवेदी, अमरउजाला कानपुर
एश्वर्या द्विवेदी, अमरउजाला कानपुर Updated Sat, 19 May 2018 01:46 PM IST
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lord shiva temple in kanpur
कानपुर के शिव मंदिर - फोटो : अमर उजाला
थानेश्वर, झगड़ेश्वर, खस्तेश्वर...ये कुछ नाम हैं देवों के देव महादेव के। यूपी के कानपुर शहर में स्थापित इन मंदिरों को ये रोचक नाम दिए हैं कनपुरियों ने। इन अजब-गजब नाम के पीछे कहानी भी अजब-गजब है। आइए जानते हैं कि क्या हैं वे दिलचस्प किस्से, कहानी...  


 

झगडे़श्वर मंदिर  

lord shiva temple in kanpur
झगडे़श्वर मंदिर   - फोटो : अमर उजाला
कालपी रोड पर झगडे़श्वर मंदिर में विराजे हैं झगडे़श्वर महादेव। इसके पीछे की कहानी काफी रोचक है। महादेव का यह छोटा सा मंदिर तीस साल से भी ज्यादा पुराना है। इलाके के लोगों की मानें तो जब यह मंदिर बनाया जा रहा था तब इसको लेकर लोगों में काफी वाद-विवाद हुआ था। जिस जगह यह स्थित है वहां मिश्रित आबादी के लोगों के बीच अक्सर झगडे़ होते रहते हैं। दंगे भी हो चुके हैं। इसी वजह से इस मंदिर का नाम झगड़ेश्वर महादेव मंदिर पड़ गया।
 

थानेश्वर महादेव मंदिर   

lord shiva temple in kanpur
थानेश्वर महादेव मंदिर    - फोटो : अमर उजाला
बिठूर में स्थित थानेश्वर महादेव मंदिर कई सालों तक बेनाम ही था। आसपास रह रहे लोगों के मुताबिक 20 साल पहले ध्रुव टीले से थोड़ी दूर पर बने एक प्राचीन मंदिर में चोरों ने हाथ साफ किया था। मौके पर पहुंचे पुलिस अधिकारियों को थोड़ी दूर झाड़ियों में शिवलिंग मिला था जिसको अधिकारियों ने बिठूर थाने के कार्यालय के सामने परिसर में बने एक मंदिर में स्थापित करा दिया। तबसे यह अनाम मंदिर था। पूर्व थानाप्रभारी तुलसीराम पांडेय ने पिछले साल दीपावली के दिन इस मंदिर की साफ-सफाई कराई और इसको थानेश्वर महादेव मंदिर नाम दे दिया।
 
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जग्गा से बने जागेश्वर 

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थानेश्वर महादेव मंदिर    - फोटो : अमर उजाला
नवाबगंज में गंगा किनारे ऐतिहासिक जागेश्वर मंदिर है। मान्यता है कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग दिन में तीन बार रंग बदलता है। सुबह भूरा, दोपहर में ग्रे और रात में काले रंग का दिखता है। मंदिर के पुजारी ने बताया कि सैकड़ों साल पहले यहां घना जंगल था। यहां गांववाले अपने मवेशी चराते थे। सिंहपुर कछार निवासी जग्गा किसान भी अपनी गायें चराने के लिए इसी टीले पर लाया करता था। उसकी एक दुधारू गाय ने दूध देना बंद कर दिया। जग्गा ने इसकी पड़ताल की तो देखा कि वह गाय टीले पर आकर दूध गिरा देती थी। जग्गा ने गांववालों को बताया। फिर लोगों ने टीले पर खुदाई शुरू की तो एक शिवलिंग मिला। गांववालों ने विधि-विधान से पूजा-पाठ के बाद उसे यहीं पर स्थापित कर जग्गा किसान के नाम से मंदिर का नाम जागेश्वर रख दिया।
 
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कोतवालेश्वर मंदिर 

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कोतवालेश्वर मंदिर  - फोटो : अमर उजाला
पहले शहर की कोतवाली चौक इलाके में हुआ करती थी। बाद में कोतवाली बड़ा चौराहा के पास शिफ्ट हुई तो चौक में कोतवाली वाले स्थान पर भगवान शिव का मंदिर बना दिया गया। चूंकि यहां पर किसी जमाने में कोतवाली हुआ करती थी इसलिए इस मंदिर को कोतवालेश्वर मंदिर नाम दे दिया गया।
 
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