उत्तर प्रदेश में इटावा के भरथना का ऊमरसेंडा गांव रविवार को अनूठी शादी का गवाह बना। गांव की एक बेटी का लॉकडाउन के कारण फंसता विवाह कुछ समझदार लोगों के योगदान से तय समय पर संपन्न हुआ। मां और पिता को कुछ साल पहले गंवा चुकी अनुसूचित परिवार की बिटिया के कन्यादान की रस्म ब्राह्मण दंपति ने निभाई।
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शादी से पहले बिटिया को दिए तोहफे
- फोटो : amar ujala
सहयोग से जुटे उपहार और दुआओं का भंडार लेकर बेटी मायके से ससुराल को विदा हुई। कोरोना से बचाव के लिए सोशल डिस्टेंसिंग पहला और जरूरी कदम है। ऊमरसेंडा गांव के चंद समझदारों ने लोगों के बीच दूरी का ख्याल रखते हुए विवाह पूरा कराया। साथ ही जाति और ऊंच-नीच की बुनियाद पर वर्षों से खड़ी सामाजिक दूरी की दीवार धराशायी की। करीब 15 साल पहले पिता श्रीकृष्ण दोहरे और इसके तीन साल बाद मां को गंवा चुकी आरती की भाई सुंदर और रतन ने मजदूरी कर परवरिश की थी।
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कन्यादान की रस्म ब्राह्मण दंपति ने निभाई
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बसरेहर क्षेत्र के गांव मलपुरा निवासी अवधेश पुत्र विजय सिंह के साथ शादी भी तय कर दी थी। शादी समारोह के लिए 25 मार्च की तारीख तय थी। लॉकडाउन से दोनों भाइयों का मजदूरी आधारित रोजगार छिना तो शादी की रस्मों से जुड़े खर्च और सामान की तैयारियां भी लॉक हो गईं। जैसे-जैसे तारीख करीब आ रही थी, आरती सहित भाइयों की चिंता और धड़कन बढ़ रही थी। अनुसूचित परिवार की ऐसी स्थिति की भनक लगने पर बड़ा कदम उठाया भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) के जिला उपाध्यक्ष ईशु तिवारी व उनके परिवार ने।
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जयमाल की रस्म के बाद दिया आशीर्वाद
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ईशु के पिता राकेश तिवारी और मां ऊषा देवी ने आरती का कन्यादान किया। भाजपा जिलाध्यक्ष अजय धाकरे ने बड़े खर्च की जिम्मेदारी ली। दरियादिल लोगों के सहयोग से सोने-चांदी के गहने, कैश,11 साड़ियां और गृहस्थी का सामान आरती को भेंट किया गया। एक कार और बाइक से दूल्हा समेत छह लोग आए बरात की शक्ल में आए। भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुबोध तिवारी, जिला कोषाध्यक्ष संजीव भदौरिया, मंडल अध्यक्ष सुशांत भदौरिया ने उपहार में सहयोग किया। सोमवार सुबह आरती को शुभकामनाओं के साथ विदा किया गया।