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lockdown in kanpur: 500 रुपये के लिए तीन लाख लोगों ने जोखिम में डाली जान

Sat, 25 Apr 2020 10:41 AM IST
शिखा पांडेय प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
प्रदीप अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 25 Apr 2020 10:41 AM IST
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lockdown in kanpur: Three lakh people risked life for 500 rupees
जनधन खाते में सरकार की ओर से भेजी गई राहत राशि निकालने की होड़ - फोटो : अमर उजाला
कानपुर में रमईपुर कस्बे की एक महिला के जनधन खाते में 50 हजार रुपये जमा हैं। उन्होंने बीते छह महीने से एक भी पैसा बैंक से नहीं निकाला, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से भेजी गई 500 रुपये की राहत राशि निकालने के लिए बुधवार को वह घंटों बैंक के बाहर लाइन में लगी रहीं।


बैंककर्मी ने पूछा कि अभी तक पैसे निकालने नहीं आईं,  तो अब जान जोखिम में क्यों डाली? महिला ने जवाब दिया कि समय पर पैसा नहीं निकाला तो सरकार की ओर से भेजी गई राहत राशि वापस जा सकती है। महिला का यह जवाब सुन बैंककर्मी ने माथा पीट लिया और समझाया कि ये पैैसा वापस जाने के लिए नहीं आया है।
lockdown in kanpur: Three lakh people risked life for 500 rupees
जनधन खाते में सरकार की ओर से भेजी गई राहत राशि निकालने की होड़ - फोटो : अमर उजाला
जिले भर के बैंक कर्मी ऐसी स्थिति का सामना लगातार कर रहे हैं। हकीकत ये है कि कोरोना के संक्रमण काल में बीते 20 दिनों में सिर्फ 500 रुपये निकालने के लिए तीन लाख लोगों ने लॉकडाउन तोड़ा। इन तीन लाख लोगों में करीब 70 फीसदी ऐसे लोग थे, जिन्होंने बीते छह महीने से खाते में कोई लेनदेन ही नहीं किया था।

 
lockdown in kanpur: Three lakh people risked life for 500 rupees
जनधन खाते में सरकार की ओर से भेजी गई राहत राशि निकालने की होड़ - फोटो : अमर उजाला
इनमें से करीब 70 हजार लोग तो सिर्फ अपना केवाईसी (पहचान संबंधी दस्तावेज) अपडेट कराने के लिए बैंकों में पहुंचे। कोरोना जैसी भीषण महामारी से बचाने के लिए जब लोगों को घरों में रखने के लिए पूरा देश बंदकर दिया गया, तब मात्र 500 रुपये के लिए लोगों ने अपनी जान जोखिम में डालने से गुरेज नहीं की। इन तीन लाख लोगों में महज 20 फीसदी लोग ही 500 रुपये निकालने की वास्तविक जरूरत वाले थे।

 
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जनधन खाते में सरकार की ओर से भेजी गई राहत राशि निकालने की होड़ - फोटो : अमर उजाला
कई शाखाओं के बाहर स्थिति खराब
हॉटस्पॉट एरिया व कुछेक अन्य शाखाओं को छोड़ दें तो सरकार की ओर से भेजी गई राहत राशि निकालने वालों का सिलसिला खत्म नहीं हो रहा है। बैंक लगातार समझा रहे हैं कि ये पैसा कभी भी निकाला जा सकता है। बावजूद इसके बैंकों में पैसा निकालने वालों की भीड़ उमड़ रही है। कई बैंक शाखाओं की हालत तो ये है कि खुलने से पहले ही 50 से ज्यादा खाताधारक पहुंच चुके होते हैं। हफ्ते भर पहले यह संख्या 100-200 के पार होती थी। भीड़ बढ़ती है तो शारीरिक दूरी भी संभव नहीं हो पाती। कई शाखाओं के बाहर तो रेलवे की जनरल बोगियों की तरह एक दूसरे से सटकर खड़े हुए लोग नजर आए हैं।

 
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जनधन खाते में सरकार की ओर से भेजी गई राहत राशि निकालने की होड़ - फोटो : अमर उजाला
यहां नहीं सुधर रहे हालात
नौबस्ता गल्ला मंडी के अंदर भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा की शाखाएं हैं। इन दोनों शाखाओं में सुबह करीब नौ बजे से ही खाताधारकों की भीड़ जमा हो जाती है। इनमें जनधन खाता धारक, किसान, श्रमिक और अन्य नौकरी पेशा वाले लोग शामिल होते हैं। महिलाओं की संख्या अधिक होती है। बैंक ऑफ बड़ौदा की इस शाखा से बीते 20 दिनों में करीब तीन हजार लोग सिर्फ 500 रुपये निकालने पहुंचे, जबकि भारतीय स्टेट बैंक में ऐसे लोगों की संख्या करीब एक हजार रही।

खाताधारकों के बीच यह अफवाह है कि सरकार की ओर से जो सहायता राशि भेजी गई है वह निकाली न गई तो वापस हो जाएगी। खाताधारकों से अपील है कि सहायता राशि निकालने में जल्दबाजी न करें। पैसा कहीं नहीं जाएगा। पैसा खातों में रहेगा। वह कभी भी निकाल सकते हैं। सबसे पहले जरूरी है कि वे खुद को और दूसरों को भी कोरोना के संक्रमण से बचाएं। - अजय कुमार वर्मा, लीड बैंक मैनेजर
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