मुझे इस बात की खुशी है कि मैंने पिता का सपना पूरा किया है। यदि वह आज होते तो बहुत खुश होते, उनकी कमी को पूरा तो नहीं किया जा सकता, लेकिन उनके सपने को साकार करने का मैं पूरा प्रयास कर रहा हूं...। सफलता की यह दास्तां है मुश्किलों को जीत लेने वाले कानपुर शहर के बाशिंदे लेफ्टिनेंट श्रीकांत मिश्रा की।
PHOTOS:'खौफ-गम' को हरा कर बेटा बना लेफ्टिनेंट, कुछ ऐसी है श्रीकांत मिश्रा की दास्तां
ओपी वाधवानी, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 27 Dec 2017 09:34 AM IST
सार
- ज्वाइनिंग लेटर लेकर मां से मिलने कानपुर आए श्रीकांत
- हाईस्कूल की परीक्षा से दो दिन पहले हुई थी पिता की हत्या
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