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जानिए प्रकृति के लिहाज से 'लोहड़ी का महत्व' और मशहूर लोकगीतों के बारे में
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Sat, 13 Jan 2018 12:00 PM IST
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लोहड़ी विशेष
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उत्साह का पर्व लोहड़ी शनिवार को है। लोहड़ी पर पंजाबी गीत संग भांगड़ा और गिद्दा इस पर्व में उल्लास भर देते हैं। लोहड़ी के स्वागत के लिए घरों के साथ-साथ सामूहिक तैयारियां भी जोरों पर हैं। जिनकी शादी के बाद पहली लोहड़ी है या जिनके घर में बच्चे ने जन्म लिया है उनके लिए तो लोहड़ी पर्व और भी ज्यादा खास है।
यूं मनाते हैं लोहड़ी
लोहड़ी विशेष
उमंग और उल्लास से सराबोर लोहड़ी की रात सुंदर-मुंदरिया गीत गाकर लोग इस पर्व को मनाते हैं। इसमें पंजाबी रॉबिनहुड दूल्हा भट्टी की प्रशंसा की जाती है। कथानुसार दूल्हा भट्टी अमीरों को लूटकर गरीबों में बांट देता था। एक बार उसने गांद की गरीब कन्या का विवाह बेटी की तरह करवाया, जिसपर गांव के जमीदार के बेटे की बुरी नजर थी। विदाई के वक्त कन्या को शगुन के तौर पर शक्कर दी। इसी से इस पर्व में अग्नि में शक्कर निर्मित चीजें डाली जाती हैं।
जीवन और सेहत से संबंध
लोहड़ी विशेष
लोहड़ी को लाल शाही भी कहते हैं। खुले आसमान के नीचे जलती आग के चारो ओर रेवड़ी, मूंगफली, मक्का और मावा इस त्योहार की पहचान है। आध्यात्मिक दृष्टि से आग का संबंध जीवन और सेहत से है। आग जलाकर उसकी तिल से पूजा कर फूल चढ़ाकर जल से आचमन किया जाता है। इसके बाद नवविवाहित जोड़ा अग्नि के फेरे लेकर खुशहाल जीवन की कामना करते हैं। लोकगीत गाकर लोग अग्नि के फेरे लेकर तिल, गुड़ चढ़ाते हैं।
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लोहड़ी के प्रमुख पंजाबी गीत
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- सुंदर मुंदरिया तेरा कौन बेचारा...
- सेर शक्कर आई हो...
- कुड़ी दा लाल पचाका हो...
- कुड़ी दा सालू पट्टा हो...
- कुड़ी दे बाझे पाई...
- दुल्ला भट्टी वाला हो...
- दुल्ले घी व्याही हो...
- सेर शक्कर आई हो...
- कुड़ी दा लाल पचाका हो...
- कुड़ी दा सालू पट्टा हो...
- कुड़ी दे बाझे पाई...
- दुल्ला भट्टी वाला हो...
- दुल्ले घी व्याही हो...
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होली तक जारी रहेगा राग बसंत हिंडोल
लोहड़ी विशेष
सिखों की आस्था व श्रद्धा के केंद्र हरि मंदिर साहिब (अमृतसर) में इसी दिन संध्या से राग बसंत हिंडोल तथा राग बिहार का गायन प्रारम्भ हो जाता है। जो कि होली तक जारी रहता है। माघ मास की पहली तारीख को मुक्तसर साहिब पंजाब में शहीदों की स्मृति में बहुत बड़ा मेला लगता है जोकि कई दिनों तक चलता है। गन्ने के रस की खीर विशेष तौर पर बनाकर बांटी जाती है।